नई दिल्ली । संसद का मॉनसून सत्र विपक्ष के हंगामें के चलते बार-बार स्थगित होता रहा, वहीं सोमवार को भी विपक्ष ने अपनी मांगों दोहराते हुए सरकार को निशाने पर लिया है। कांग्रेस और टीएमसी के सांसदों ने सरकार पर छात्रों के साथ कठोर व्यवहार करने, पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था में सुधार को लेकर गंभीरता नहीं होने का आरोप लगाया। इस दौरान विपक्ष ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सार्वजनिक माफी मांगने और गृह मंत्री अमित शाह की निंदा की भी मांग दोहराई।
कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) और झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के सांसदों ने सरकार पर आरोप लगाया कि वह नए कानून के जरिए जनता और छात्रों को गुमराह करने का प्रयास कर रही है, जबकि शिक्षा व्यवस्था में सुधार और पेपर लीक मामलों पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हो रही है। कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने संसद परिसर में कहा कि उन्हें बिहार और पश्चिम बंगाल में छात्रों के खिलाफ एफआईआर दर्ज किए जाने की जानकारी मिली है। उन्होंने कहा कि अपुष्ट सूचनाओं के आधार पर कार्रवाई उचित नहीं मानी जा सकती।
कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने संशोधन विधेयक की आवश्यकता पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार पहले भी पेपर लीक रोकने के लिए कानून बना चुकी है। उन्होंने पूछा कि यदि पहले का कानून पर्याप्त था तो नए संशोधन की जरूरत क्यों पड़ी। उन्होंने आरोप लगाया कि छात्रों के विरोध-प्रदर्शन के दौरान उन पर कथित रूप से पेलेट गन का इस्तेमाल किया गया और कहा कि सरकार को दोषियों के खिलाफ ठोस कार्रवाई करनी चाहिए थी। उन्होंने यह भी दावा किया कि पेपर लीक मामलों में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) अब तक आरोपपत्र दाखिल नहीं कर सका है और मुख्य आरोपी अब भी फरार है।
लोकसभा में कांग्रेस के उपनेता गौरव गोगोई ने कहा कि केवल कानून में बदलाव पर्याप्त नहीं है, बल्कि निष्पक्ष और प्रभावी जांच भी आवश्यक है। उन्होंने आरोप लगाया कि जांच में कमियों के कारण आरोपियों को राहत मिल रही है और सरकार शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार के प्रति गंभीर नहीं दिख रही। कांग्रेस सांसद उज्ज्वल रमन सिंह ने कहा कि किसी भी कानून की सफलता उसके प्रभावी क्रियान्वयन पर निर्भर करती है। उन्होंने आरोप लगाया कि यदि समय पर जांच पूरी नहीं होती और आरोपपत्र दाखिल नहीं किया जाता, तो आरोपी कानूनी प्रक्रिया का लाभ उठा सकते हैं।
टीएमसी के वरिष्ठ सांसद सौगत रॉय ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) में सुधार के लिए गठित हाई पावर्ड टास्क फोर्स का स्वागत किया, लेकिन कहा कि इससे विपक्ष की प्रमुख मांगें पूरी नहीं होतीं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सार्वजनिक तौर पर माफी मांगने और छात्रों पर कथित बल प्रयोग के मुद्दे पर गृह मंत्री अमित शाह की निंदा की मांग दोहराई। वहीं, टीएमसी सांसद सागरिका घोष ने आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों के खिलाफ अत्यधिक बल प्रयोग किया गया।
झामुमो सांसद महुआ माजी ने कहा कि उनकी पार्टी विधेयक पर गंभीर चर्चा चाहती है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार पहले भी पेपर लीक रोकने के आश्वासन देती रही है, लेकिन अपेक्षित परिणाम नहीं मिले। उन्होंने कहा कि भविष्य में प्रभावी कानून बनाने के लिए विपक्ष के सुझावों को भी शामिल किया जाना चाहिए। विपक्ष ने जोर देकर कहा कि केवल कठोर कानून बनाने से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि पारदर्शी व्यवस्था और प्रभावी क्रियान्वयन ही परीक्षा प्रणाली में भरोसा बहाल कर सकता है।
WhatsApp Group जुड़ने के लिए क्लिक करें 👉
Join Now


