संताल एक्सप्रेस संवाददाता
पाकुड़ ।जैसे-जैसे विधानसभा चुनाव नजदीक आ रहा है सोशल मीडिया में आम लोगों सहित राजनीतिक कार्यकर्ताओं की प्रतिक्रिया सोशल मीडिया में पाकुड़ विधानसभा को लेकर छाई हुई है. खासकर सुदेश कुमार महतो की पार्टी के संभावित उम्मीदवार को लेकर आम लोगों में चर्चा का विषय बना हुआ है. पाकुड़ विधानसभा के पूर्व विधायक अकील अख्तर के कोषाध्यक्ष सदाकाश अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर लिखते हैं कि पिछली बार जब अकील अख्तर साहब भाजपा समर्थित पार्टी आजसु से विधायक प्रत्याशी के रूप में चुनावी मैदान में खड़े थे उस समय पाकुड़ विधानसभा के लोगों ने उन पर खास एतराज जताया था कि भाजपा समर्थित पार्टी को आखिर वोट क्यों दे. दरअसल पाकुड़ विधानसभा क्षेत्र मुस्लिम बाहुल्य इलाका माना जाता है. इस विधानसभा में मुसलमानों का वोट विधायक बनाने में निर्णायक भूमिका माना जाता है. परंतु पिछली बार जब सुदेश कुमार महतो की पार्टी आजसु से पूर्व विधायक अकील अख्तर ने चुनाव लड़ा था तो लोगों में अकील अख्तर के ऊपर तो भरोसा जताया था परंतु भाजपा समर्थित पार्टी होने के कारण अकील अख्तर को वोट नहीं मिला था.जिसका नतीजा यह हुआ था कि पूर्व ग्रामीण विकास विभाग मंत्री आलमगीर आलम को भारी भरकम वोटो से पाकुड़ विधानसभा क्षेत्र के लोगों ने जीताने का काम किया था. सुदेश कुमार महतो की पार्टी आजसु जो भाजपा समर्थित पार्टी है और एनडीए का हिस्सा है. इस पार्टी से भी इस बार संभावित प्रत्याशी के रूप में एक चेहरे को मैदान में देखा जा रहा है जो काफी चर्चित भी है. अब सवाल यह भी उठ रहा है कि पिछली बार की तरह इस बार भी भाजपा समर्थित आजसू पार्टी को पाकुड़ विधानसभा क्षेत्र के लोगों का भरोसा होगा या फिर नहीं. क्योंकि पूर्व विधायक अकील अख्तर को पाकुड़ विधानसभा क्षेत्र के लोगों की नाराजगी इस कदर सहनी पड़ी कि उन्हें आखिरकार उस पार्टी से ही इस्तीफा देना पड़ा.हालांकि 2019 के विधानसभा चुनाव मेँ पाकुड़ विधानसभा में आजसू और भाजपा का गठबंधन ना होने के बावजूद जनता का यह भ्रम था की आजसू और भाजपा दोनों एक ही हैं. इस बार अगर इस विधानसभा में भाजपा और आजसू का गठबंधन हो तो क्या आम लोग इतनी जल्दी भरोसा करेंगे?पूर्व विधायक अकील अख्तर शायद यह समझ चुके थे कि पाकुड़ विधानसभा क्षेत्र के लोग भाजपा समर्थित पार्टी को चाहते ही नहीं है. और वह कभी भी उस पार्टी से जीत नहीं सकते. इसलिए उनको पार्टी से संन्यास लेना पड़ा. खैर चुनावी मौसम है. और इस चुनावी मौसम में सभी संभावित प्रत्याशी अपने-अपने विचारधाराओं से लोगों को अपनी ओर खींचने की कोशिश में है।
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