बासुकीनाथ मंदिर का गौशाला नहीं रहने से चढ़ावै के गोवंशीय पशु हैं भगवान भरोसे
जरमुंडी । बासुकीनाथ मंदिर का अपना गौशाला नहीं रहने से चढ़ावै में छोड़े जानेवाले गोवंशीय पशुओं की बीमारी और भुखमरी से असामयिक मौत हो रही है। बासुकीनाथ में गोवंशीय पशुओं के लिए गोशाला की मांग चिरलंबित है। किन्तु मंदिर प्रशासन गोशाला निर्माण को लेकर गंभीर नहीं है।हालिया वर्षों में बासुकीनाथ में गोशाला निर्माण के लिए स्थानीय लोगों ने सामुहिक पहल कर गोशाला निर्माण की दो बार भूमि पूजन कर आधार शिला भी रखी ,किन्तु बात आई गई होकर रह गई। बहरहाल गोवंशीय पशुओं की सुरक्षा,देखभाल और भोजन की व्यवस्था का उचित प्रबंध नहीं रहने से पशु काल कवलित हो रहे हैं। बताते चलें कि आए दिनों बाबा बासुकीनाथ के भक्त अपनी मन्नतें पूरी होने पर मंदिर परिसर में गोवंशीय पशुओं को छोड़कर चले जाते हैं। बता दें कि पिछले तीन दिनों से बासुकीनाथ पानी टंकी स्थित पंचवटी में मंदिर का चढ़ावा एक गोवंशीय पशु बीमार था। जिसकी सामाजिक कार्यकर्ता निरंजन मंडल द्वारा पशु चिकित्सक से इलाज कराया गया। पशुचिकित्सा क्षेत्र में कार्य कर रहे सभी कर्मी इनदिनों हड़ताल पर हैं। बावजूद पशु चिकित्सकों ने मानवता का परिचय दिया और मौत से जंग लड़ते बीमार पशु की चिकित्सा करके जिन्दगी लौटाई। चिकित्सा कर्मी सोहन यादव, विनोद शर्मा, प्रमोद कुमार, संतोष शर्मा सहित स्थानीय युवा विवेक राव,किशन साह ने भी सहयोग किया। गोवंशीय पशुओं के सुरक्षित आवासन और उचित देखभाल हेतु बाबा बासुकीनाथ की नगरी में गौशाला का न होना एक बड़ी समस्या है। इस पर मंदिर प्रशासन को विचार करने की जरूरत है।


