नई दिल्ली । केंद्र सरकार ने संसद के मानसून सत्र से पहले होने वाली सर्वदलीय बैठक में नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया यानी एनसीपीआई को भी आमंत्रित किया है। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला की औपचारिक मंजूरी के बाद एनसीपीआई के दोनों सदनों के नेताओं को बैठक में शामिल होने का न्योता भेजा गया है। लोकसभा में सुदीप बंदोपाध्याय को पार्टी का नेता और काकोली घोष दस्तीदार को मुख्य सचेतक नियुक्त किया गया है। शताब्दी रॉय को पार्टी का उपनेता बनाया गया है।
दरअसल, तृणमूल कांग्रेस छोड़कर एनसीपीआई में शामिल हुए 20 सांसदों के विलय को लोकसभा अध्यक्ष ने मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही एनसीपीआई लोकसभा में पांचवीं सबसे बड़ी पार्टी बन गई है। तृणमूल कांग्रेस की संख्या 28 से घटकर 8 रह गई है। वहीं, शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के सांसदों की संख्या घटकर 3 हो गई है, जबकि एकनाथ शिंदे की शिवसेना की संख्या बढ़कर 13 हो गई है।
एनसीपीआई के नेताओं ने नए संसद भवन में पार्टी कार्यालय आवंटित करने और सदन में 20 सांसदों के बैठने की व्यवस्था को लेकर भी ओम बिरला से चर्चा की है।
इसके अलावा एनसीपीआई मंगलवार को होने वाली राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की बैठक में भी शामिल होगी। अब राजग संसदीय दल की बैठकों को ‘मंगल मिलन’ कहा जाएगा। पहली ‘मंगल मिलन’ बैठक 21 जुलाई को संसद भवन परिसर में होगी।
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मुंबई । महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के छह बागी सांसदों के अलग समूह को लोकसभा अध्यक्ष द्वारा आधिकारिक मान्यता दिए जाने के बाद उद्धव ठाकरे को बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। लोकसभा अध्यक्ष की मंजूरी के बाद लोकसभा सचिवालय ने इस संबंध में अधिसूचना जारी कर दी है। इसके साथ ही मुख्यमंत्री (तत्कालीन शिवसेना विभाजन के बाद बने गुट के नेता) एवं उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले शिवसेना गुट का चर्चित ऑपरेशन टाइगर सफल माना जा रहा है। मालूम हो कि लोकसभा चुनाव में उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना के कुल 9 सांसद निर्वाचित हुए थे। इनमें से 6 सांसद, जो कुल संख्या के दो-तिहाई हैं, बाद में शिंदे गुट के साथ चले गए। पहले इन सांसदों को दिल्ली ले जाया गया, जहां उन्होंने अलग संसदीय समूह बनाने का दावा किया। इसके बाद लोकसभा अध्यक्ष ने इस समूह को मान्यता प्रदान कर दी। बाद में इन सांसदों ने मुंबई में आयोजित एक सार्वजनिक कार्यक्रम में एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में औपचारिक रूप से प्रवेश किया। हालांकि, इस राजनीतिक घटनाक्रम के बाद भी लोकसभा अध्यक्ष की अंतिम मंजूरी लंबित थी। अब लोकसभा सचिवालय द्वारा मंजूरी मिलने के साथ ही इन छह सांसदों के अलग समूह को आधिकारिक मान्यता मिल गई है। इससे उद्धव ठाकरे गुट को एक और बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है।


