शास्त्र और शस्त्र की शक्ति से ही सुरक्षित होगा सनातन- हंसानंद गिरि जी महाराज
उधवा- उधवा प्रखंड के राधानगर में रविवार को विराट हिंदू सम्मेलन कार्यक्रम सफलता पूर्वक सम्पन्न हुआ. कार्यक्रम की अध्यक्षता झारखंड राज्य आर्य प्रतिनिधि सभा रांची के उपप्रधान काशीनाथ आर्य ने किया. मंचीय कार्यक्रम से पूर्व सैकड़ों की संख्या में माताओं बहनों ने कलश यात्रा के माध्यम से पूरे गांव को भक्तिमय कर दिया. मंचीय कार्यक्रम के दौरान सर्वप्रथम अतिथियों ने स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा पर माल्यार्पण अपरांत दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया. कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि के रूप में वृन्दावन धाम से अखिल भारतीय संत महासभा के सदस्य श्रद्धेय स्वामी हंसानंद गिरि जी महाराज पहुंचे. वहीं मंचीय अतिथि के रूप में आरएसएस के विभाग संघचालक डॉ राजकुमार साहा, विभाग प्रचारक अजय कुमार, विभाग कार्यवाह मृत्युंजय, समाज सेवी अतुल मंडल सम्मिलित हुए.सनातन संस्कृति के संरक्षण और हिंदू समाज की एकजुटता का संकल्प लेकर सकल हिन्दू समाज के बैनर तले राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के नेतृत्व में आयोजित विराट हिंदू सम्मेलन में जनसमूह का महाकुंभ उमड़ पड़ा. केसरिया ध्वजों और जय श्री राम के उद्घोष के बीच वक्ताओं ने वर्तमान चुनौतियों पर प्रहार करते हुए युवाओं और महिलाओं को धर्म का रक्षक बनने का आह्वान किया.
इतिहास के पन्नों से भविष्य की नींव
सम्मेलन को संबोधित करते हुए मुख्य वक्ता ने भारतीय इतिहास की गौरवशाली परंपरा को याद किया. उन्होंने कहा कि भारत की माटी बलिदानों की गवाह रही है. रामायण और महाभारत का उदाहरण देते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि शांति की बात तभी शोभा देती है जब आपके पास सामर्थ्य हो.श्रीराम का धैर्य और श्रीकृष्ण की रणनीति आज के हिंदू को इन दोनों के समन्वय की आवश्यकता है. वहीं लव जिहाद पर कड़ा प्रहार करते हुए समाज में बढ़ती कुरीतियों और षड्यंत्रों पर चर्चा करते हुए सम्मेलन में लव जिहाद के मुद्दे पर गहरा रोष व्यक्त किया गया. वक्ताओं ने इसे केवल सामाजिक समस्या नहीं, बल्कि एक सुनियोजित जनसांख्यिकीय हमला बताया. उन्होंने अभिभावकों से अपील किया कि वे अपने बच्चों को सनातन संस्कारों से जोड़ें ताकि वे किसी भी प्रकार के वैचारिक या छद्म प्रलोभन का शिकार न हों.
युवा और मातृशक्ति- राष्ट्र के दो स्तंभ
विभाग प्रचारक अजय कुमार ने कार्यक्रम में युवा शक्ति को राष्ट्र की रीढ़ बताते हुए उन्हें अपनी ऊर्जा देशहित में लगाने को प्रेरित किया गया. वहीं मातृशक्ति के संबोधन में वक्ताओं ने कहा इतिहास गवाह है कि जब-जब धर्म संकट में पड़ा है. जीजाबाई और रानी लक्ष्मीबाई जैसी माताओं ने ही धर्मरक्षक योद्धा तैयार किए हैं. आज की नारी को दुर्गा और काली का स्वरूप धारण कर अपनी संस्कृति की रक्षा करनी होगी. वहीं युवाओं को मोबाइल और पाश्चात्य संस्कृति के जाल से निकलकर ग्रंथों की ओर लौटने का आह्वान किया.
समाज सेवी अतुल मंडल ने जाति-पाति के बंधनों को तोड़कर अखंड हिंदू समाज के निर्माण पर जोर देने की अपील की.
वहीं सांस्कृतिक गौरव रामायण और महाभारत को केवल कथा नहीं बल्कि जीवन जीने की नियमावली बताया. अंत में सम्मेलन के समापन पर हजारों की संख्या में उपस्थित जनसमूह ने हाथ उठाकर राष्ट्र और धर्म के प्रति समर्पित रहने की शपथ ली. समापन उपरांत सभी श्रोताओं ने प्रसाद रूपी खिचड़ी का सेवन कर घर को प्रस्थान किए.आयोजकों ने स्पष्ट बताया कि यह केवल एक आयोजन नहीं बल्कि एक सोए हुए समाज को जगाने का शंखनाद है. इस प्रकार का आयोजन आगे भी होता रहेगा.इस दौरान आयोजकों ने कार्यक्रम को सफल बनाने में सहयोगियों की सराहना करते हुए सकल हिन्दू समाज को धन्यवाद दिया वहीं विशेष तौर पर सभी स्वयं सेवको को धन्यवाद दिया.


