जामताड़ा। महिला आरक्षण बिल से जुड़ा 131वां संविधान संशोधन बिल संसद में गिर गया। लोकसभा में महिला आरक्षण और परिसीमन संशोधन विधेयक पर व्यापक चर्चा के बाद अब इस महत्वपूर्ण बिल पर शुक्रवार शाम को वोटिंग हुई। कुल 528 सदस्यों ने मतदान किया, जिसमें 298 सांसदों ने इस विधेयक के समर्थन में मतदान किया, जबकि 230 सांसदों ने इसके विरोध में वोट डाला। इस तरह बहुमत के आंकड़े 352 से बिल 54 वोट से गिर गया। महिला आरक्षण बिल गिरने पर जामताड़ा की महिलाओं ने अपनी-अपनी प्रतिक्रिया दी।
————————————————————————————————————————
गांव स्तर पर महिलाएं काफी काम करती हैं, लेकिन निर्णय लेने में उनकी भूमिका कम होती है। अगर महिला आरक्षण लागू होता तो पंचायत से लेकर संसद तक महिलाओं की आवाज मजबूत होती। यह विधेयक पास नहीं होना महिलाओं के अधिकारों के लिए एक झटका है। -प्रियंका दास
————————————————————————————————————————
गांव में महिलाएं खेती से लेकर घर तक सब संभालती हैं, लेकिन निर्णय पुरुष ही लेते हैं। अगर महिलाओं को आरक्षण मिलता तो वे अपनी बात खुलकर रख पातीं। यह विधेयक पास होना जरूरी था।
-आभा आर्या
————————————————————————————————————————
महिलाओं को आगे बढ़ाने के लिए केवल बातें नहीं, ठोस कदम जरूरी हैं। महिला आरक्षण विधेयक एक बड़ा कदम हो सकता था, लेकिन इसका पास न होना निराशाजनक है। उम्मीद है कि भविष्य में इसे जरूर लागू किया जाएगा।
-सुजाता सिंह
————————————————————————————————————————
महिलाएं समाज की आधी आबादी हैं, लेकिन उनकी राजनीतिक भागीदारी बहुत कम है। महिला आरक्षण विधेयक से यह संतुलन बन सकता था। इसे पास न करना महिलाओं के साथ न्याय नहीं है।
-बुल्टी चौधरी
————————————————————————————————————————
आज महिलाएं हर क्षेत्र में काम कर रही हैं, फिर राजनीति में ही क्यों पीछे रखा जा रहा है? यह विधेयक पास होता तो महिलाओं के लिए रास्ता आसान होता। सरकार को इस विषय को टालना नहीं चाहिए, बल्कि इसे प्राथमिकता देनी चाहिए।
– ज्योति देवी
————————————————————————————————————————
हम महिलाएं आर्थिक रूप से मजबूत हो रही हैं, लेकिन राजनीतिक रूप से अभी भी पीछे हैं। महिला आरक्षण विधेयक से हमें आगे बढ़ने का मौका मिलता। यह न पास होना कहीं न कहीं हमारी भागीदारी को रोकता है। सरकार को इस दिशा में ठोस कदम उठाना चाहिए।
– रिबिका दास
————————————————————————————————————————
शिक्षा के क्षेत्र में महिलाओं ने अपनी योग्यता साबित की है। अब जरूरत है कि उन्हें राजनीति में भी समान अवसर मिले। महिला आरक्षण विधेयक पास नहीं होना लोकतंत्र के लिए भी अच्छा संकेत नहीं है। महिलाओं की भागीदारी से नीतियां ज्यादा समावेशी बनेंगी।
-नूपुर सरकार
————————————————————————————————————————
महिला आरक्षण विधेयक का पास न होना बहुत निराशाजनक है। आज भी महिलाओं को बराबरी का मौका नहीं मिल पा रहा है। राजनीति में हमारी भागीदारी बढ़ेगी तो समाज की कई समस्याओं का बेहतर समाधान निकलेगा। सरकार को इस पर गंभीरता से फिर से प्रयास करना चाहिए। महिलाएं केवल घर तक सीमित नहीं हैं, वे देश चलाने की क्षमता भी रखती हैं।
-आलो मुखर्जी
WhatsApp Group जुड़ने के लिए क्लिक करें 👉
Join Now


