नई दिल्ली- बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के प्रत्यर्पण को लेकर भारत और बांग्लादेश के बीच कूटनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। हाल ही में बांग्लादेश के विदेश मंत्री खलीलुर रहमान की भारत यात्रा के दौरान इस संवेदनशील मुद्दे को आधिकारिक तौर पर उठाया गया, जिस पर भारत सरकार ने अब अपना रुख स्पष्ट कर दिया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने शुक्रवार को एक प्रेस ब्रीफिंग में जानकारी दी कि बांग्लादेश की ओर से शेख हसीना के प्रत्यर्पण के लिए प्राप्त अनुरोध की वर्तमान में समीक्षा की जा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह मामला फिलहाल न्यायिक और आंतरिक कानूनी प्रक्रियाओं के दायरे में है, इसलिए भारत ने इस संबंध में अभी तक कोई निश्चित समयसीमा या ठोस प्रतिबद्धता जाहिर नहीं की है।
दूसरी ओर, मॉरीशस के पोर्ट लुई में आयोजित 9वें हिंद महासागर सम्मेलन के दौरान भी यह मुद्दा छाया रहा। वहां बांग्लादेश के विदेश मंत्री खलीलुर रहमान ने दोहराया कि ढाका अपनी मांग पर अडिग है और बीएनपी के नेतृत्व वाली नई सरकार इस प्रक्रिया को तार्किक अंजाम तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। बांग्लादेश सरकार ने शेख हसीना पर 5 अगस्त 2024 को देश छोड़ने से पहले हुए कथित अपराधों को लेकर प्रत्यर्पण की मांग की है। बांग्लादेश की नई सत्ता के लिए यह एक बड़ा घरेलू राजनीतिक मुद्दा बन चुका है, जिसके कारण वे लगातार भारत पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं। अपनी दिल्ली यात्रा के दौरान खलीलुर रहमान ने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ उच्च स्तरीय बैठकें कीं। इन वार्ताओं के केंद्र में न केवल प्रत्यर्पण का मुद्दा रहा, बल्कि बांग्लादेश के नवनियुक्त प्रधानमंत्री तारिक रहमान की संभावित भारत यात्रा पर भी गहन चर्चा की गई। भारत ने इस दौरान यह संदेश देने की कोशिश की है कि वह क्षेत्रीय स्थिरता और बांग्लादेश की जनता के हितों के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
गौरतलब है कि शेख हसीना लंबे समय तक भारत की सबसे भरोसेमंद सहयोगियों में से एक रही हैं। पिछले साल 5 अगस्त को बांग्लादेश में भड़के हिंसक विरोध प्रदर्शनों और तख्तापलट की स्थिति के बाद वे सुरक्षित भारत आ गई थीं और तब से यहीं प्रवास कर रही हैं। भारत के लिए यह स्थिति काफी जटिल है, क्योंकि एक तरफ वर्षों पुराना मैत्रीपूर्ण संबंध है और दूसरी तरफ पड़ोसी देश की नई सरकार के साथ कूटनीतिक तालमेल बैठाने की चुनौती। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कानूनी और कूटनीतिक खींचतान आने वाले दिनों में दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगी।
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