टैरिफ वार…पीएम मोदी 7 साल बाद पहुंचे चीन, जिनपिंग-पुतिन सहित 20 से ज्यादा देश के नेताओं के साथ करेंगे मुलाकात
वाशिंगटन/बीजिंग । प्रधानमंत्री मोदी दो दिन की जापान यात्रा के बाद शनिवार को एससीओ समिट में शामिल होने के लिए चीन पहुंच गए हैं। वे सात साल बाद चीन पहुंचे हैं। एससीओ समिट से इतर पीएम मोदी चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूसी राष्ट्रपति पुतिन के साथ द्विपक्षीय वार्ता भी करेंगे। इस दौरान राष्ट्रपति पुतिन के दिसंबर में भारत दौरे के प्रोग्राम पर भी चर्चा होगी। पीएम मोदी का यह दौरा ऐसे समय पर हो रहा है, जब पूरी दुनिया अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प की टैरिफ नीतियों से जूझ रही है। ट्रम्प ने भारत पर 50 प्रतिशत तो चीन पर 30 प्रतिशत टैरिफ लगाया है। चीन में 31 अगस्त से 1 सितंबर तक एससीओ समिट की बैठक होने वाली है। इसमें 20 से ज्यादा देशों के नेता शामिल होंगे। उधर, अमेरिका की एक अपील कोर्ट ने ट्रम्प के ज्यादातर टैरिफ को गैरकानूनी बताया है। कोर्ट का कहना है कि ट्रम्प ने इन टैरिफ को लागू करने के लिए जिस कानून का सहारा लिया, वह उन्हें यह अधिकार नहीं देता। कोर्ट ने कहा कि ट्रम्प के पास हर आयात पर टैरिफ लगाने की असीमित शक्ति नहीं है। हालांकि, कोर्ट ने इस फैसले को अक्टूबर तक लागू करने से रोक दिया है, ताकि ट्रम्प सुप्रीम कोर्ट में अपील कर सकें। ट्रम्प ने इस फैसले की कड़ी आलोचना करते हुए सोशल मीडिया पर लिखा कि अगर ये टैरिफ हटे, तो अमेरिका बर्बाद हो जाएगा। ट्रम्प ने चीन, कनाडा, मेक्सिको जैसे देशों पर व्यापार घाटे और अन्य कारणों से टैरिफ लगाए थे। उन्होंने तर्क दिया था कि अमेरिका का व्यापार घाटा ही राष्ट्रीय आपातकाल है। ट्रम्प ने इन कानूनों को अंतर्राष्ट्रीय आपातकालीन आर्थिक शक्ति अधिनियम के तहत सही ठहराया था।
उनका कहना था कि व्यापार असंतुलन अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा है और इसलिए उन्होंने व्यापार पर ‘नेशनल इमरजेंसी’ घोषित कर टैरिफ लगाए। अब कोर्ट ने इसे खारिज कर दिया और कहा कि शुल्क लगाना राष्ट्रपति के अधिकार में नहीं आता, यह शक्ति केवल संसद के पास है। 15 प्रतिशत टैरिफ ही लगा सकते हैं यह फैसला छोटे व्यवसायों और अमेरिकी राज्यों के गठबंधन द्वारा दायर मुकदमों पर आया है। कोर्ट ने कहा कि ट्रम्प 150 दिनों तक 15 प्रतिशत टैरिफ लगा सकते हैं, लेकिन इसके लिए ठोस कारण चाहिए। फैसले में कहा गया कि ‘टैरिफ’ शब्द का कहीं जिक्र नहीं है और न ही इसमें राष्ट्रपति के अधिकारों पर कोई स्पष्ट सीमा तय की गई है। कोर्ट ने यह भी कहा कि जब संसद चाहती है कि राष्ट्रपति को शुल्क लगाने का अधिकार दिया जाए, तो वह इसे कानून में साफ-साफ लिखती है। अमेरिका की छवि को गटर में डाल रहे ट्रम्प अमेरिका के पूर्व सुरक्षा सलाहकार जैकब जेरेमिया सुलिवन ने अमेरिका की तुलना चीन से की।
उन्होंने कहा कि आज विश्व चीन को एक जिम्मेदार देश के तौर पर देख रहा है। जबकि ट्रम्प सरकार ने अमेरिका की छवि को गटर में मिला रही है, जिस पर कोई भी देश भरोसा नहीं करना चाहता है। सुलिवन ने चीन को अमेरिका का विकल्प बताया। उन्होंने कहा कि चीन कई देशों में लोकप्रियता के मामले में अमेरिका से आगे निकल गया है। एक साल पहले तक ऐसा नहीं था। अब कई देश कह रहे हैं कि ब्रांड अमेरिका खत्म हो चुका है और चीन एक जिम्मेदार खिलाड़ी की तरह नजर आ रहा है। सुलिवन ने भारत पर टैरिफ को लेकर ट्रम्प सरकार की आलोचना की। उन्होंने कहा कि टैरिफ से वॉशिगटन और दिल्ली के बीच संबंध खराब हुए हैं। ट्रम्प ने भारत को चीन से बातचीत करने के लिए मजबूर किया है। जबकि बाइडेन सरकार भारत से रिश्ते मजबूत करने की कोशिश कर रही थी। ताकि चीन को काउंटर किया जा सके। सुलिवन ने अमेरिकी निवेश बैंक की रिपोर्ट के हवाला देते हुए बताया कि ट्रम्प ने अपने निजी गुस्से के कारण भारत पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाया है। क्योंकि भारत ने ट्रम्प के भारत-पाकिस्तान में सीजफायर वाले बयान को गलत बताया था।


