एस.के.झा.’सुमन’
दुमका। दुमका नगर परिषद के गलियारों में जब अनुभव और जनता के बीच मौजूदगी की बात आती है, तो एक नाम प्रमुखता से उभरता है अभिषेक चौरसिया। साल 2008 से 2018 तक, यानी एक पूरे दशक तक वार्ड पार्षद के रूप में जमीन पर रहकर समस्याओं से दो-दो हाथ करने वाले अभिषेक चौरसिया इस बार नगर परिषद अध्यक्ष पद के लिए ताल ठोक रहे हैं। चेहरे पर आत्मविश्वास और सेवा का संकल्प लिए अभिषेक का चुनाव चिह्न ‘बैटरी टॉर्च’ और क्रमांक 4 है, जिसे वे केवल एक सिंबल नहीं बल्कि शहर के अंधेरों (समस्याओं) को मिटाने और पारदर्शिता लाने वाला मशाल मानते हैं। उनके लिए राजनीति कोई पेशा नहीं, बल्कि वह कसौटी है जिस पर वे पिछले 10 सालों के अपने कार्यों के दम पर खरे उतरे हैं। आज की खास बातचीत में अभिषेक चौरसिया साझा कर रहे हैं दुमका के ‘सर्वांगीण विकास’ का अपना विज़न और वह रोडमैप, जिसके जरिए वे शहर की सूरत बदलने का इरादा रखते हैं। ‘संताल एक्सप्रेस’ के ब्यूरो प्रभारी एस. के. झा. ‘सुमन’ ने उनके साथ कि एक बेबाक चर्चा।
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जनता क्यों करें आपको वोट
भ्रष्टाचार के विरुद्ध मेरी लड़ाई केवल वादा नहीं, मेरा इतिहास है। मैंने हर कदम पर ईमानदारी और पारदर्शिता को जिया है, जिसे जनता ने और आपने करीब से देखा है। जनता के हक की रक्षा और साफ-सुथरी राजनीति के लिए मेरा संघर्ष जारी रहेगा। उम्मीद है कि व्यवस्था परिवर्तन और सशक्त नेतृत्व के लिए मुझे जनता अपना बहुमूल्य वोट देगी।
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सवाल : नगर की मुख्य समस्या क्या है और आपका 100 दिनों का एजेंडा क्या होगा?
जवाब : मेरे नगर की सबसे बड़ी समस्या आज बदहाल सफाई व्यवस्था और तेजी से बढ़ता जल संकट है। जगह-जगह कूड़े के ढेर, गंदगी और खासकर रसिकपुर इलाके में हर साल गर्मी के मौसम में पानी की किल्लत आम लोगों की जिंदगी को मुश्किल बना देती है। यह सिर्फ असुविधा नहीं, बल्कि जनस्वास्थ्य और शहर की छवि दोनों के लिए गंभीर चुनौती है।
इसी को ध्यान में रखते हुए मेरा 100 दिनों का एजेंडा सिर्फ वादों तक सीमित नहीं, बल्कि एक ठोस 13 सूत्री एक्शन प्लान पर आधारित है। मेरा पहला लक्ष्य होगा हर घर तक शुद्ध पेयजल की उपलब्धता, नियमित सफाई व्यवस्था को दुरुस्त करना और शहर को कूड़ा मुक्त बनाना।
इसके साथ ही बेहतर सड़क और बिजली व्यवस्था, आम जनता की समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए जन-सुनवाई प्रणाली और शहर के सफाईकर्मियों को सम्मानजनक 15,000 रुपये मानदेय व त्योहारों पर बोनस देने का संकल्प है।
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सवाल : भ्रष्टाचार और कमीशनखोरी पर कैसे लगाम लगाएंगे?
जवाब : भ्रष्टाचार बातों से नहीं, नीयत और ट्रैक रिकॉर्ड से खत्म होता है। 2008 से 2018 के बीच के 10 साल गवाह हैं कि अभिषेक चौरसिया ने भ्रष्टाचार को मिटाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ा है। जनता अब कथनी और करनी का अंतर समझ चुकी है। मेरा संकल्प स्पष्ट है हम सिस्टम में ‘जीरो टॉलरेंस’ लाएंगे। हम कमीशनखोरी के खिलाफ केवल चुनाव में नहीं, बल्कि हर दिन सड़क से नगर परिषद तक लड़ेंगे। जब तक एक-एक पैसे का हिसाब पारदर्शी नहीं हो जाता, मेरी यह लड़ाई जारी रहेगी।
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सवाल : गरीबों के कल्याण के लिए आपकी क्या योजना है?
जवाब : मेरा लक्ष्य गरीबों को कर्ज के जाल से मुक्त करना है। मैं महिलाओं को शोषणकारी ‘ग्रुप लोन’ से आजादी दिलाकर बैंकों के माध्यम से कम ब्याज और आसान शर्तों पर ऋण उपलब्ध कराऊँगा। हम बिचौलियों को हटाकर सीधे बैंकिंग सिस्टम से जोड़ेंगे, ताकि हर गरीब परिवार आर्थिक रूप से सशक्त और स्वावलंबी बन सके।
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सवाल : जनता की सीधी भागीदारी कैसे सुनिश्चित करेंगे या सिर्फ चुनाव तक ही रिश्ते रहेंगे?
जवाब : जनता के साथ हमारे रिश्ते केवल चुनाव तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह सेवा और निरंतर संवाद का एक अटूट बंधन है। मेरा मानना है कि राजनीति केवल पदों का खेल नहीं, बल्कि लोगों के सुख-दुख में उनके साथ खड़े होने का माध्यम है।
वर्ष 2018 में उपाध्यक्ष पद का चुनाव लड़ने के बाद, हार-जीत की परवाह किए बिना मैंने अपना हर दिन जनता के बीच बिताया है। उस दिन से लेकर आज तक, एक भी ऐसा दिन नहीं गया जब मैंने लोगों से मुलाकात न की हो या उनकी समस्याओं को न सुना हो। मेरी कार्यशैली का सबसे बड़ा प्रमाण दुमका की जनता का वह स्नेह और आशीर्वाद है, जो मुझे प्रतिदिन मिलता है। जनता की सीधी भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए मेरा दरवाजा और मेरा समय हमेशा उनके लिए खुला रहता है। चुनाव सिर्फ एक प्रक्रिया है, लेकिन सेवा का यह संकल्प जीवनभर का है।


