नई दिल्ली । देश में पेट्रोल और डीजल के दामों में एक बार फिर बड़ा उछाल देखने को मिल सकता है। रिपोर्ट्स के अनुसार तेल विपणन कंपनियों को हो रहे भारी नुकसान के चलते आने वाले दिनों में पेट्रोल और डीजल की कीमतें 10-10 रुपये प्रति लीटर तक बढ़ सकती हैं। हाल ही में सरकार द्वारा की गई 3-3 रुपये की बढ़ोतरी भी घाटे की भरपाई के लिए पर्याप्त नहीं साबित हुई है, जिससे आम जनता पर महंगाई का एक और बड़ा बोझ पड़ने की आशंका है। यह स्थिति कच्चे तेल की वैश्विक कीमतों में अप्रत्याशित वृद्धि का सीधा परिणाम है। इसी साल फरवरी के महीने में इंटरनेशनल मार्केट में क्रूड ऑयल का रेट 70 डॉलर प्रति बैरल था, जो यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद से ही लगातार 100 डॉलर प्रति बैरल के पार बना हुआ है।
इस ऊंची कीमत के कारण तेल कंपनियों को पेट्रोल और डीजल की बिक्री पर भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। रिपोर्ट्स बताती हैं कि कीमतों में हालिया वृद्धि से पहले, इन कंपनियों को रोजाना लगभग 1000 करोड़ रुपये का घाटा हो रहा था। अगर यही स्थिति बनी रही, तो चालू तिमाही में ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को 57000 करोड़ रुपये तक का भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। घाटे की भरपाई के लिए सरकार ने हाल ही में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 3-3 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की थी। हालांकि, तेल कंपनियों का घाटा इतना बड़ा है कि यह कदम भी नाकाफी साबित हुआ है। यही वजह है कि अब बड़े इजाफे की आशंका गहरा गई है। यह भी गौरतलब है कि सरकारी कंपनियों से बहुत पहले ही शेल इंडिया और नायरा एनर्जी जैसी निजी कंपनियों ने अपने ग्राहकों के लिए पिछले महीने ही पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ा दिए थे। ऐसे में आने वाले दिनों में ईंधन की कीमतों में बड़ी बढ़ोतरी आम जनता की जेब पर और भारी बोझ डालेगी, जिससे दैनिक उपभोग की वस्तुओं और परिवहन लागत में भी इजाफा हो सकता है।


