जुलाई माह में अनुमान से 27.89 फ़ीसद कम वर्षापात, अगस्त में भारी वर्षा के आसार
एस.के.झा.’सुमन’
दुमका: खेती के बारे में यह कहा जाता है ‘जो बोये मई के महीने में धान उसको समझो सफल किसान’ लेकिन दुमका जिला में मई महीना तो क्या जून और जुलाई का आधा महीना बिना वर्षा के ही गुजर गया लिहाजा समय पर किसान धान की बिजाई भी नहीं कर पाए। जुलाई के द्वितीय पखवाड़ा में हल्की फुल्की वर्षा हुई भी है तो किसान निचली भूमि में कुछ बिजाई कर पाए हैं, और जिनके पास निचली भूमि नहीं है, वह अभी तक अच्छे वर्षा का इंतजार ही कर रहे हैं। जिन लोगों ने निचली भूमि पर बिजाई की थी, उनके पौधे आने के बाद अब उनके सामने धान रोपने की समस्या आ खड़ी हुई है। क्योंकि धान को रोपने के लिए जल जमाव जरूरी है और यहां वर्षा ढंग से हो ही नहीं रही है।
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मानसून के बेरुखी ने 10 बार सूबे में करवाया सूखाग्रस्त घोषित
झारखंड को 10 बार सूखाग्रस्त घोषित किया जा चुका है। पहले हर तीन या चार साल में सूखा पड़ता था, लेकिन अब हर साल कम बारिश की वजह से सूखे की स्थिति बन रही है। 2022 में भी राज्य के 22 जिलों के 260 ब्लॉकों में से 226 को सूखाग्रस्त घोषित किया गया। पिछले साल भी राज्य में कम बारिश की वजह से 24 जिलों के 158 प्रखंडों को सरकार ने सूखाग्रस्त घोषित किया था।
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क्या कहते हैं किसान
डीजल पंप द्वारा तालाब और नदी से खेतों में सिंचाई की जा रही है। पर डीजल की महंगाई के कारण डीजल पंप से सिंचाई करना बेहद महंगा पड़ रहा है अगर तो 4 दिनों में बारिश नहीं हुई तो धान की फसल पूरी तरह से बर्बाद हो जाएगी। इससे सारी मेहनत बेकार हो जाएगी।
झबन महतो, किसान बेलटिकरी
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कृषि कार्य का आधा समय पार हो गया। खेत में धान का बिचड़ा धूप में झूलस कर नष्ट हो गया। बाजार से उन्नत धान बीज खरीद कर खेत में डाले थे। एक तिहाई धान आ बिचड़ा सूख कर मर गया। घर में जो भी पूंजी था वह खेती शुरु होने के साथ ही लगा दिए।
अनिल यादव, किसान बैजा
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अगर समय रहते भरपुर बारिश नहीं हुई तो भारी नुक्सान उठाना पड़ सकता है। धान का बिचड़ा तैयार है सिर्फ पानी का इंतजार कर रहे हैं अगर भरपूर पानी आज हो जाए तो कल से रोपनी का कार्य पूरे क्षेत्र में शुरू हो जाएगा। नहीं तो पुरे परिवार के सामने भुखमरी की स्थिति उत्पन्न हो जायेगी।
रामजीवन किस्कू, किसान जालवे
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अब यदि बारिश हुई तो नीचले जमीन पर ही धान की रोपाई संभव है। इस परिस्थिति में साल भर परिवार का पालन पोषण कैसे होगा यही सोच कर बुरा हाल है। राज्य सरकार क्षेत्र को सुखाड़ घोषित कर आर्थिक मदद करें।
फनीलाल महतो, किसान बेलटिकरी
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क्या कहते हैं जिला कृषि पदाधिकारी
जिला कृषि पदाधिकारी सत्य प्रकाश ने बताया कि दुमका के 10 प्रखंडों में धान फसल के आच्छादन का लक्ष्य 1 लाख 11 हजार हेक्टर का लक्ष्य था, जिसमें अब 20 हजार 7 सौ 48 हेक्टर धान रोपनी की होने की संभावना है। जून महीने में वर्षापात 218.13 मिलीमीटर है। जबकि जून माह में मात्र 33.08 मिमी वर्षा हुई जो की 84.83 फ़ीसद की कमी है वहीं जुलाई माह में सामान्य वर्षापात 335.2 मिमी होना था इसमें से मात्र 241.71 मिमी ही हो पाई है 27.89 फ़ीसद की कमी है। अगस्त माह में मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार भारी वर्षा के आसार हैं। अनुमान से कम वर्षा होने से फसल में तो कमी आएगी परंतु अगस्त माह में भारी बरसात से कुछ विशेष राहत मिलने की उम्मीद है । 15 अगस्त के बाद आच्छादन का आकलन कर स्थिति का लिया जाएगा जायजा।


