नई दिल्ली । पिछले कई महीनो से तेल कंपनियां भारतीय उपभोक्ताओं से डीजल और पेट्रोल में भारी मुनाफा वसूल कर रही हैं। 10 से 11 रुपए प्रति लीटर डीजल और पेट्रोल से कमाई सरकारी क्षेत्र की तीन प्रमुख पेट्रोलियम कंपनियां कर रही हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम कम हुए। सरकार ने कीमत घटाने के स्थान पर दो-दो रुपए प्रति लीटर उत्पाद शुल्क बढ़ा दिया। इससे सरकारी खजाने की भी कमाई बढ़ गई। आम आदमी पेट्रोल और डीजल में लुटता चला गया।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल 21 फीसदी तक सस्ता हुआ है। भारत में पेट्रोल का भाव 80 रूपये प्रति लीटर से ज्यादा नहीं होना था। इसके बाद भी भारतीय बाजार में पेट्रोल और डीजल के दामों में कोई कमी नहीं की गई। रूस से सस्ता तेल भारत की तेल कंपनियों द्वारा खरीदा गया। इसका फायदा भी उपभोक्ताओं के स्थान पर अडानी और अंबानी की कंपनियां को मिला। जिस तरह से बेरोजगारी और मंदी देखने को मिल रही है। उसके बाद भारत में भी पेट्रोल और डीजल के दाम कम नहीं किया जा रहे हैं। कीमतों को लेकर उपभोक्ताओं में अब गुस्सा देखने को मिल रहा है। सरकारी क्षेत्र की 3 कंपनियां जो पूरे भारत में पेट्रोल और डीजल बेचने का काम करती हैं। इन्होंने लंबे समय से पेट्रोल और डीजल के दाम अंतरराष्ट्रीय बाजार के अनुसार तय करने चाहिए थे। वह नहीं किया, खुले आम भारतीय उपभोक्ताओं से हर माह अरबों रुपए की लूट की जा रही है।


