धनबाद में खनन से सरकारी जमीन के उपयोग पर बड़ा खुलासा
धनबाद । झारखंड विधानसभा की विशेष समिति ने धनबाद परिसदन में भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (बीसीसीएल), ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (ईसीएल) समेत अन्य खनन कंपनियों द्वारा रैयतों, सरकारी व वन भूमि पर अवैध खनन और ओवरबर्डन डंपिंग की समस्या की समीक्षा की। इस समीक्षा के बाद समिति ने खुलासा किया कि इन कंपनियों ने बिना अनुमति सरकारी भूमि का उपयोग किया है, जिससे राज्य सरकार को 1000 करोड़ रुपए से अधिक का राजस्व प्राप्त होगा। समिति के सभापति सह टुंडी विधायक मथुरा प्रसाद महतो ने बताया कि विभिन्न कोल कंपनियों ने रैयतों और सरकारी जमीन का उपयोग किया है। बीसीसीएल ने सरकारी जमीन के उपयोग के लिए पहले ही 220 करोड़ रुपए राजस्व जमा करा दिए हैं।
सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड (सीसीएल) और ईसीएल ने भी सरकारी जमीन के इस्तेमाल की बात स्वीकार करते हुए राजस्व भुगतान पर सहमति दी है, जिससे राज्य सरकार को कुल 1000 करोड़ रुपए से अधिक का राजस्व मिलेगा। महतो ने जोर दिया कि समिति के आकलन से राज्य सरकार के साथ-साथ रैयतों को भी आर्थिक लाभ होगा। उन्होंने बताया कि नौ महीने पहले सिंदरी विधायक द्वारा ओवरबर्डन डंपिंग का मामला संज्ञान में लाए जाने के बाद ही इस समिति का गठन किया गया था। समिति यह सुनिश्चित कर रही है कि जिन रैयतों की जमीन खनन के लिए उपयोग की गई है, उन्हें पूरा मुआवजा मिले। इसके लिए जिला प्रशासन और बीसीसीएल को रैयतों की समस्या का सरल तरीके से निपटारा करने का निर्देश दिया गया है। बैठक में क्षेत्र की अन्य समस्याओं और विकास कार्यों पर भी विचार-विमर्श किया गया।


