जल शक्ति मंत्रालय और झारखंड सरकार के बीच दिल्ली में हुआ एमओयू
रांची । झारखंड के ग्रामीण इलाकों में हर घर तक शुद्ध पेयजल पहुंचाने की महत्वाकांक्षी योजना जल जीवन मिशन को एक बार फिर संजीवनी मिल गयी है।पिछले दो वर्षों से केंद्र सरकार से राशि (केंद्रांश) नहीं मिलने के कारण राज्य में थमी पड़ी पेयजल योजनाएं अब फिर से रफ्तार पकड़ेंगी। मंगलवार को नयी दिल्ली में केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय और झारखंड सरकार के बीच जल जीवन मिशन 2.0 को लेकर एक सहमति पत्र (एमओयू) पर हस्ताक्षर किये गये हैं। इस समझौते के बाद केंद्र सरकार से राज्य को मिलने वाली लंबित राशि का रास्ता साफ हो गया है।दिल्ली में आयोजित इस विशेष एमओयू साइनिंग समारोह की अध्यक्षता केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल ने की। इस मौके पर पेयजल एवं स्वच्छता मंत्री विशेष रूप से मौजूद थे। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन भी इस समारोह में ऑनलाइन जुडे।इस उच्चस्तरीय बैठक में केंद्रीय जल शक्ति राज्य राज्य मंत्री वी सोमन्ना, जल शक्ति मंत्रालय के सचिव, राष्ट्रीय जल जीवन मिशन के प्रबंध निदेशक सहित केंद्र और राज्य सरकार के कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
सभी पक्षों ने रेलवे, वन विभाग और अन्य केंद्रीय एजेंसियों से एनओसी (एनओसी) मिलने में होने वाली देरी को दूर करने और योजनाओं को समय पर पूरा करने का संकल्प लिया।राज्य में जल जीवन मिशन की मौजूदा स्थिति काफी चुनौतीपूर्ण है।आंकड़ों के मुताबिक झारखंड में अब भी 45 प्रतिशत ग्रामीण परिवार शुद्ध पेयजल (नल के जल) से वंचित हैं।हालांकि राज्य सरकार के प्रयासों से अब तक 55 प्रतिशत परियोजनाएं पूरी कर ली गयी हैं, लेकिन शेष 45 प्रतिशत आबादी तक पानी पहुंचाने के लिए योजनाओं को युद्धस्तर पर पूरा करना होगा।बैठक में मल्टी विलेज स्कीम (एमवीएस) और सिंगल विलेज स्कीम (एसवीएस) पर विशेष जोर दिया गया, ताकि सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों तक जलापूर्ति सुनिश्चित की जा सके।मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने बैठक में केंद्र के समक्ष राज्य का पक्ष मजबूती से रखा और फंड की वास्तविक स्थिति से अवगत कराया।वर्ष 2019-20 से अब तक राज्य में कुल 24,635 करोड़ की लागत वाली पेयजल योजनाओं का क्रियान्वयन किया जा रहा है।राज्य में 55 प्रतिशत परियोजनाएं पूर्ण हो चुकी हैं, जबकि इसके मुकाबले केंद्र सरकार द्वारा अब तक केवल 46 प्रतिशत अनुदान ही उपलब्ध कराया गया है।वित्तीय वर्ष 2024-25 और 2025-26 में केंद्र से कोई पर्याप्त धनराशि जारी नहीं की गयी है। मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार से लगभग 6,500 करोड़ की लंबित सहायता राशि शीघ्र जारी करने की मांग की।
केंद्रांश की राशि को लेकर पेयजल एवं स्वच्छता मंत्री पिछले एक साल से प्रयासरत थे। उन्होंने अधिकारियों के साथ केंद्रीय जल शक्ति मंत्री से मुलाकात की थी।इस बैठक के बाद केंद्र सरकार ने झारखंड के लिए विशेष रूप से 2,500 करोड़ की राशि आवंटित करने का निर्णय लिया है, बशर्ते राज्य जेजेएम 2.0 के मानकों का अनुपालन सुनिश्चित करे।बैठक में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री श्री सीआर पाटिल ने नीतिगत बातें स्पष्ट कीं। कहा कि योजनाओं के रेट्रोफिटिंग और नियमित संचालन एवं रखरखाव (ओएंडएम ) के लिए केंद्र सरकार कोई वित्तीय सहायता नहीं देगी।इसके लिए राज्य को 16वें वित्त आयोग द्वारा पंचायती राज संस्थानों (पीआरआइ) को दिये गये अनुदान का उपयोग करना होगा।झारखंड में 100 करोड़ से अधिक लागत वाली बड़ी योजनाओं की उच्चतम स्तर पर सख्त समीक्षा की जायेगी।साथ ही, बैठक में 1,400 करोड़ की अनुचित लागत वाले ओवरसाइज्ड घटकों की समीक्षा करने के निर्देश दिये गये हैं।
झारखंड जेजेएम के प्रबंध निदेशक (एमडी) पद को संयुक्त सचिव रैंक के अधिकारी द्वारा संभालने की सिफारिश की गयी है।इसके अलावा जिलाधिकारियों (डीएम/डीसी) को ग्राउंड लेवल पर एक्टिव रहने को कहा गया है।पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के मंत्री योगेंद्र प्रसाद ने कहा कि राज्य सरकार हर ग्रामीण परिवार तक नल से जल पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है।पिछले दो सालों से फंड रुकने के कारण काम प्रभावित हुआ था, लेकिन इस एमओयू के बाद अब बाधाएं दूर हो गयी हैं। राज्य की प्रत्येक ग्राम पंचायत में तैनात जल सहिया को हमारी सरकार 2,500 प्रतिमाह की सहायता दे रही है, ताकि सिंगल विलेज स्कीम (एसवीएस) का सतत संचालन हो सके। हमने केंद्र से इस मद में भी सहयोग की अपेक्षा की है।अब हमारा पूरा ध्यान बची हुई 45 फीसदी आबादी तक जल्द से जल्द शुद्ध पानी पहुंचाने पर है।


