क्यू कॉम्प्लेक्स में बनेगा हाईटेक क्लॉक रूम
देवघर । विश्व प्रसिद्ध राजकीय श्रावणी मेला 2026 की तैयारियों के बीच बाबा बैद्यनाथधाम मंदिर प्रशासन ने श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुलभ दर्शन को लेकर एक बड़ा और ऐतिहासिक फैसला लिया है। मंदिर परिसर में सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक पुख्ता करने तथा भीड़ को नियंत्रित रखने के लिए अब श्रद्धालुओं के मोबाइल फोन और बैग ले जाने पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया गया है। इस नई व्यवस्था के तहत बाबा मंदिर में प्रवेश करने से पहले सभी भक्तों को अपना मोबाइल, बैग और अन्य कीमती सामान अनिवार्य रूप से क्लॉक रूम या लॉकर में जमा करना होगा। प्रशासन का मानना है कि इस कदम से मंदिर परिसर के भीतर अनावश्यक भीड़-भाड़ और वीभत्स स्थिति से बचा जा सकेगा, जिससे जलार्पण की प्रक्रिया और अधिक सुरक्षित व सुगम हो जाएगी।
श्रद्धालुओं को इस नियम के कारण किसी भी तरह की परेशानी न हो, इसके लिए मंदिर परिसर के क्यू कॉम्प्लेक्स में एक अत्याधुनिक और विशाल क्लॉक रूम का निर्माण तेजी से किया जा रहा है। यहाँ भक्त अपने सामान को पूरी तरह सुरक्षित रख सकेंगे। प्रशासन इस डिजिटल और आधुनिक क्लॉक रूम की व्यवस्था को बेहद सरल बनाने पर काम कर रहा है, ताकि लाइन में लगे भक्तों का समय बर्बाद न हो और वे व्यवस्थित ढंग से कतार में आगे बढ़ सकें। श्रावणी मेले की प्रशासनिक तैयारियों को लेकर बाबा मंदिर प्रभारी सह एसडीएम रवि कुमार के नेतृत्व में एक उच्चस्तरीय टीम ने पूरे परिसर का व्यापक निरीक्षण किया। इस दौरान क्यू कॉम्प्लेक्स, मुख्य प्रवेश मार्ग और सुरक्षा व्यवस्था का बारीकी से जायजा लिया गया। भीड़ नियंत्रण की रणनीति का खुलासा करते हुए प्रशासन ने बताया कि सामान्य दिनों में श्रद्धालुओं के प्रवेश के लिए मानसरोवर स्थित कैंपस के पास से रूट तैयार किया जाएगा, ताकि भारी भीड़ को कतारबद्ध तरीके से संभाला जा सके।
मंदिर प्रभारी रवि कुमार ने आश्वस्त किया है कि नया क्लॉक रूम सावन का पवित्र महीना शुरू होने से पहले हर हाल में पूरी तरह बनकर तैयार हो जाएगा। उन्होंने यह भी संकेत दिए हैं कि श्रद्धालुओं के हित को ध्यान में रखते हुए यह क्लॉक रूम सेवा या तो पूरी तरह निःशुल्क होगी या फिर इसके लिए बेहद नाममात्र का शुल्क लिया जाएगा। प्रशासन को पूरा भरोसा है कि इस नई व्यवस्था से देवघर आने वाले करोड़ों कांवरियों और शिवभक्तों को बाबा बैद्यनाथ के दर्शन और सुल्तानगंज से लाए पवित्र गंगाजल को अर्पित करने में पहले से कहीं अधिक बेहतर, सुरक्षित और अनुशासित माहौल मिलेगा।


