विशाखापत्तनम । रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम नेवल डॉकयार्ड में आईएनएस महेंद्रगिरि को भारतीय नौसेना में शामिल कर दिया। महेंद्रगिरि प्रोजेक्ट-17ए की नीलगिरि कैटेगरी का छठा स्टेल्थ फ्रिगेट (युद्धपोत) है। आईएनएस महेंद्रगिरि स्वदेशी अत्याधुनिक हथियारों, सेंसर और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम से लैस है। यह हवाई हमलों, दुश्मन के जहाजों और पनडुब्बियों से एक साथ मुकाबला करने में सक्षम है। यह हिंद महासागर में भारत की समुद्री सुरक्षा को और मजबूत करेगा। साथ ही इंडो-पैसिफिक रीजन को सुरक्षित और स्थिर बनाने में भूमिका निभाएगा।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक राजनाथ सिंह ने कहा कि आंध्र प्रदेश के कुरनूल में 8 ड्रोन कंपनियों के समूह के साथ ड्रोन सिटी बनाई जा रही है। उन्होंने कहा कि जिस तरह सूरत डायमंड सिटी और बेंगलुरु सिलिकॉन वैली के नाम से जाना जाता है, उसी तरह कुरनूल देश का ड्रोन हब बनेगा। इस आईएनएस महेंद्रगिरि को भारतीय नौसेना के वॉरशिप डिजाइन ब्यूरो ने डिजाइन किया है और मुंबई स्थित मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड ने तैयार किया है। युद्धपोत में 75फीसदी से ज्यादा स्वदेशी उपकरण और तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। इसके निर्माण में देशभर की कई कंपनियों ने भी योगदान दिया, जिससे रक्षा उत्पादन को बढ़ावा मिलने के साथ रोजगार के अवसर भी बढ़े हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक महेंद्रगिरि में उन्नत स्टेल्थ तकनीक दी गई है, जिससे इसकी रडार पर पहचान करना मुश्किल होगा। इसमें कम्बाइंड डीजल और गैस प्रोपल्शन सिस्टम लगाया गया है, जो इसे लंबी दूरी तक तेज गति से संचालन की क्षमता देता है। प्रोजेक्ट-17ए के तहत भारतीय नौसेना के लिए कुल 7 स्टेल्थ गाइडेड-मिसाइल फ्रिगेट बनाए जा रहे हैं। इनमें से 4 युद्धपोत मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स मुंबई बना रहा है। 3 युद्धपोत गार्डन रीच शिप बिल्डर्स कोलकाता बना रहा है।
प्रोजेक्ट-17ए, प्रोजेक्ट-17 का एडवांस्ड वर्जन है। इसमें पहली बार भारत में बड़े युद्धपोतों के निर्माण में इंटीग्रेटेड कंस्ट्रक्शन तकनीक का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया गया।
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