बीते तीन माह में चार बिल वापस लिए
नई दिल्ली। हाल ही में केंद्र सरकार ने बिना आरक्षण वाले मंत्रालय में यूपीएससी की लेटरल एंट्री नोटिफिकेशन को वापस लिया है। प्रधानमंत्री मोदी के कहने पर बोर्ड ने नोटिफिकेशन को वापस लिया है। लेकिन, राहुल गांधी हो या अखिलेश यादव या फिर तेजस्वी यादव, इसकी वापसी पर अपना पीठ थपथपा रहे है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने ट्वीट कर, एनडीए की गठबंधन वाली सरकार और बीजेपी की बहुमत वाली सरकार’ में अंतर बताया है। हालांकि ये पहली बार नहीं है, जब मोदी की सरकार ने पब्लिक की सेंटीमेंट को देखकर बिल वापस लिया है।
मोदी सरकार की वे फैसले जो जनता की भावना को देखकर वापस लिए
लोकसभा चुनाव 2014 में ऐसा माना जाने लगा था कि ‘मोदी की लहर’ चल रही है। 2019 के लोकसभा चुनाव में भी ऐसा कह सकते हैं कि ‘मोदी मैजिक’ चला और बीजेपी ने 2014 के अपने ही रिकॉर्ड को ध्वस्त कर दिया और 303 सीटों पर बाजी मार ली, वहीं, एनडीए को 353 सीटें जीतीं। अब बात आती है 2024 के 18वीं लोकसभा चुनाव की। पीएम मोदी, जो कि बीजेपी के प्रमुख चेहरा थे। 18वीं लोकसभा 2024 के चुनाव के नतीजे बीजेपी के मुताबिक नहीं रहे। बीजेपी को 240 सीटें मिलीं। वहीं, एनडीए को 392 तक पहुंची। 10 साल में पहली बार हुआ था, जब बीजेपी बहुमत के जादुई आंकड़े को छू नहीं सके। लेकिन, तीसरी बार पीएम मोदी के नेतृत्व में सरकार बनी। पिछले 10 साल में पीएम मोदी की आगुवाई सरकार ने कई फैसले लिए थे, जिसका विपक्ष ने विरोध किया था। लेकिन, आम जनता वाली बिल सरकार अपने बहुमत के दम पर आसानी से कराने में सफल रही।
अब जब 2024 में मोदी को बहुमत के आंकड़े के लिए एनडीए के साथियों के सहारे की जरूरत पड़ी। पीएम मोदी के नेतृत्व में बनी एनडीए गठबंधन की ये सरकार तीसरे महीने में प्रवेश कर चुकी है। लेकिन इस बार कई मौके आए, जब सरकार को अपने कदम वापस खींचने पड़े। इसमें 4 बिल खूब चर्चा में रहे, जहां सरकार को आखिरी वक्त में अपना फैसला बदलना पड़ा।
केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों लेटरल एंट्री
हाल ही में यूपीएससी (यूपीएससी) ने केंद्र सरकार के अलग-अलग मंत्रालयों के 45 पदों के लिए लेटरल इंट्री का नोटिफिकेशन जारी किया था। इस पर जमकर विवाद हुआ। विपक्ष ने आरक्षण के मुद्दे पर मोदी सरकार को घेरा। साथ ही बीजेपी की सहयोगी पार्टियों जेडीयू, एलजेपी (रामविलास पासवान) और जितन राम मांझी की पार्टी ने इसका विरोध किया। हालांकि, पीएम मोदी आदेश जारी कर इस विज्ञापन को वापस लेने का आदेश दिया।
वक्फ बोर्ड बिल
तीसरे कार्यकाल में मोदी सरकार वक्फ बोर्ड संशोधलन बिल लेकर आई थी। बिल को लेकर सदन में जमकर हंगामा हुआ। मोदी सरकार चाहती तब बिल को पास करा सकती थी, लेकिन बढ़ते विवाद के देखकर मोदी सरकार ने बिल को जेपीसी (ज्वाइंट पार्लियामेंट्री कमेटी) को भेज दिया।
ब्रॉडकास्ट बिल 2024
तीसरे कार्यकाल के पहले ही मानसून सत्र में केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव बिल को पेश किया था। इस बिल को लेकर न केवल विपक्ष बल्कि डिजिटल न्यूज पब्लिशर्स और इंडिविजुअल कॉन्टेंट क्रिएटर्स ने केंद्र सरकार के कदम का विरोध किया। अंततः मंत्रालय ने बिल को वापस लेने और इस नए मसौदे के साथ बिल लाने की जानकारी दी।
लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस बिल-
वित्त मंत्री निर्मला सितारमण 23 जुलाई को बजट सत्र में यह बिल लेकर आईं थीं। इसमें मोदी सरकार ने कुछ प्रावधान किए थे, जिससे बिजनेस मैन से लेकर आम आदमी भी काफी सरकार के प्रति नाराजगी जाहिर की थी। बहरहाल, मोदी सरकार को चौतरफा आलोचना झेलनी पड़ी, जिसके बाद सरकार ने इसमें संशोधन कर जनता के पक्ष में कर दिया।


