कानून को समझकर जनता को बताएं कि झारखंड को कहां हो रहा नुकसान : सांसद
देवघर। एमएमडीआर संशोधन कानून को लेकर झारखंड में जारी राजनीतिक विवाद के बीच गोड्डा सांसद डॉक्टर निशिकांत दुबे ने हेमंत सोरेन सरकार पर निशाना साधा है। देवघर स्थित आवास पर प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने राज्य सरकार के कानून के विरोध पर सवाल उठाते हुए कहा कि पहले एमएमडीआर संशोधन कानून को ठीक से समझा जाए और फिर जनता को बताया जाए कि इससे झारखंड को आखिर कहां नुकसान हो रहा है। निशिकांत दुबे ने कहा कि खनन कानून को लेकर केवल राजनीतिक विरोध करने के बजाय उसके प्रावधानों और वास्तविक प्रभाव पर चर्चा होनी चाहिए। उन्होंने राज्य सरकार से यह स्पष्ट करने को कहा कि संशोधन के किस प्रावधान से झारखंड के हित प्रभावित हो रहे हैं।
कोयले को लेकर भी उठाया सवाल
सांसद ने कोयले को लेकर राज्य सरकार के रुख पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि यदि दूसरे खनिज उत्पादक राज्यों में एमएमडीआर संशोधन को लेकर इसी तरह का विरोध नहीं हो रहा है, तो झारखंड में इसका विरोध क्यों किया जा रहा है।
दुबे ने अपने तर्क के समर्थन में दूसरे राज्यों का उदाहरण भी दिया। उनका कहना है कि कोयले की दर को लेकर ओडिशा और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों के लिए जो व्यवस्था होगी, वही झारखंड पर भी लागू होगी। ऐसे में राज्य सरकार को अपने विरोध का स्पष्ट आधार बताना चाहिए।
बोले, खनिज संपदा से ही विकास तय नहीं होता
निशिकांत दुबे ने खनिज संपदा और विकास को जोड़कर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि किसी राज्य की समृद्धि केवल खदानों की संख्या से तय नहीं होती। उन्होंने स्विट्जरलैंड और सिंगापुर जैसे देशों का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां खनिज संपदा के बावजूद आर्थिक विकास का आधार अलग है। उन्होंने कहा कि विकास के लिए बेहतर सोच, नीतियां और उनका सही क्रियान्वयन जरूरी है। खनिज संपदा का बेहतर इस्तेमाल किस तरह राज्य के विकास में हो, इस पर चर्चा होनी चाहिए।
राज्य सरकार पर भ्रम फैलाने का आरोप
दुबे ने एमएमडीआर संशोधन कानून को लेकर राज्य सरकार पर लोगों को भ्रमित करने का आरोप भी लगाया। उनका कहना है कि कानून के वास्तविक प्रावधानों की जानकारी जनता के सामने रखे बिना केवल विरोध करने से स्थिति स्पष्ट नहीं होगी। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि सरकार को लगता है कि संशोधन से झारखंड को आर्थिक नुकसान होगा, तो वह इसका पूरा हिसाब जनता के सामने रखे।


