अगर जरूरी जानकारी सही नहीं भरी, तो ई-वे बिल या ई-इनवॉइस नहीं होगा जनरेट
नई दिल्ली । एक अगस्त से कई सारे फाइनेंशियल बदलाव होने वाले हैं। इन बदलावों में जीएसटी से जुड़े नए नियम भी लागू होंगे। अगर आप बिजनेस, दुकान या ट्रेडिंग का काम करते हैं, तो इन नए नियमों को समय रहते समझ लेना जरूरी है। नए बदलावों से ई-इनवॉइस और ई-वे बिल सिस्टम को बेहतर और ट्रांसपरेंट बनाया जाएगा। अगर जरूरी जानकारी सही तरीके से नहीं भरी, तो आपका ई-वे बिल या ई-इनवॉइस जनरेट नहीं होगा, जिससे आपके माल की सप्लाई और कारोबार पर असर पड़ सकता है।
रिपोर्ट के मुताबिक सबसे बड़ा बदलाव बिल-टू-शिप-टू ट्रांजेक्शन से जुड़ा है। अब ऐसे मामलों में शिप-टू जीएसटीआईएन देना अनिवार्य होगा। इसके अलावा सिस्टम अब जीएसटीआईएन, स्टेट कोड और पिन कोड जैसी जानकारियों की भी जांच करेगा। वहीं, कारोबारियों को अब जरूरत पड़ने पर ई-वे बिल को स्वेच्छा से बंद करने की सुविधा भी मिलेगी। इसलिए 1 अगस्त से पहले अपने बिलिंग सॉफ्टवेयर और मास्टर डेटा को अपडेट कर लेना बेहतर रहेगा।
1 अगस्त से बिल-टू-शिप-टू और कॉम्बिनेशन ट्रांजेक्शन में शिप-टू पार्टी का जीएसटीआईएन देना अनिवार्य होगा। अगर शिप-टू पार्टी जीएसटी में रजिस्टर्ड है तो उसका सही जीएसटीआईएन दर्ज करना होगा। वहीं, अगर वह अनरजिस्टर्ड है तो यूआरपी दर्ज करना होगा। यह नियम आईआरएन, स्टैंडअलोन ई-वे बिल और आईआरएन के साथ बनने वाले ई-वे बिल, तीनों पर लागू होगा। अब सिस्टम शिप-टू जीएसटीआईएन, शिप-टू स्टेट कोड, शिप-टू पिन कोड और बिल-टू व शिप-टू जीएसटीआईएन की आपस में चेक करेगा। अगर इनमें कोई जानकारी गलत या अधूरी हुई तो ई-इनवॉइस का आईआरएन या ई-वे बिल जनरेट नहीं होगा1 इसलिए सभी रिकॉर्ड और एड्रेस की जानकारी सही रखना जरूरी होगा।
जीएसटीआईएन ने अब वालेंटरी ई-वे बिल क्रूसर की सर्विस शुरू की है यानी माल की डिलीवरी पूरी होने के बाद सप्लायर, रिसीवर या ट्रांसपोर्टर पोर्टल या एपीआई के जरिए ई-वे बिल को खुद से बंद कर सकते हैं। इससे बेवजह खुले रहने वाले ई-वे बिल की समस्या कम होगी और रिकॉर्ड भी व्यवस्थित रहेगा। ये बदलाव बिल शिप टू और संबंधित ट्रांजेक्शन पर लागू होंगे। सामान्य जीएसटी लेनदेन पर इनका सीधा असर नहीं पड़ेगा। हालांकि, जिन कारोबारियों के ऐसे ट्रांजेक्शन होते हैं, उन्हें नए नियमों का पालन करना जरूरी होगा, नहीं तो ई-इनवॉइस और ई-वे बिल जनरेट होने में दिक्कत आ सकती है।


