राजसमंद । राजस्थान के राजसमंद जिले में स्थित रकमगढ़ किला खेड़ाना पंचायत क्षेत्र में आता है। रकमगढ किले का इतिहास प्राचीन राजसमंद झील से जुड़ा हुआ है, जो एशिया की सबसे पुरानी कृत्रिम मीठे पानी की झीलों में शामिल है। यह किला भले ही छोटा हो, लेकिन इसकी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्वता बेहद बड़ी मानी जाती है। इतिहास के पन्नों में रकमगढ़ किला स्वतंत्रता संग्राम के दौरान विशेष स्थान रखता है। कोठारिया रियासत के तत्कालीन राव साहब ने इस किले का निर्माण करवाया था। कहा जाता है कि महान क्रांतिकारी तात्या टोपे ने अंग्रेजों से बचने के लिए लगभग 45 दिनों तक इसी किले में शरण ली थी। जैसे ही अंग्रेजों को इसकी भनक लगी, उन्होंने किले पर हमला कर दिया। तात्या टोपे ने कोठारिया राव से मदद मांगी और इसके बाद किला और आसपास के क्षेत्र में तोपों से जबरदस्त गोलाबारी हुई। आज भी किले की दीवारों पर उस संघर्ष के निशान साफ देखे जा सकते हैं।
इतिहास में एक और महत्वपूर्ण घटना रही, जब झांसी की रानी लक्ष्मीबाई को तात्या टोपे पर हमले की जानकारी मिली। उन्होंने स्वयं रकमगढ़ किले तक पहुंचकर अंग्रेजों को पीछे हटवाया। इसके बाद तात्या टोपे ने यह जगह छोड़ दी, लेकिन तब से यह किला उनकी वीरता, साहस और बलिदान की मूक गवाही देता रहा। इतिहास के साथ-साथ रकमगढ़ किला अपनी रहस्यमय कथाओं के लिए भी प्रसिद्ध है। पहाड़ी पर स्थित होने के कारण आसपास के गांवों में इसे भूत-प्रेत से जोड़कर देखा जाता है। ग्रामीणों का मानना है कि तात्या टोपे और झांसी की रानी ने अपना खजाना किले की जमीन में दबाया था। वर्षों पहले कई लोगों ने किले में 5 से 10 फीट गहरे गड्ढे खोद डाले, इसी विश्वास के चलते। स्थानीय बुजुर्गों के अनुसार, किले के पास दो लोक देवताओं के मंदिर हैं और खजाने की रखवाली एक विशाल काले सांप द्वारा की जाती है।
मान्यता है कि सांप के सिर पर धार्मिक निशान हैं। कहा जाता है कि सपनों में माताजी के दर्शन करने वाले लोग किले से धन निकाल सकते हैं और सांप उन्हें नुकसान नहीं पहुंचाता। हालांकि, समय-समय पर सांप के काटने से हुई कुछ दुर्घटनाओं ने इन कथाओं को और प्रामाणिक बना दिया। आज रकमगढ़ किला कोठारिया राजपरिवार की निजी संपत्ति है। पुरातत्व विभाग के अधीन होने के बावजूद संरक्षण की कमी के कारण यह धीरे-धीरे खंडहर में बदलता जा रहा है। लेकिन इसकी जर्जर दीवारें आज भी स्वतंत्रता संग्राम, वीरता और लोककथाओं की अनकही कहानियों की गवाही देती हैं। रकमगढ़ किला केवल एक ऐतिहासिक इमारत नहीं, बल्कि आज़ादी की लड़ाई, शौर्य और रहस्यों का जीवंत प्रतीक है।
WhatsApp Group जुड़ने के लिए क्लिक करें 👉
Join Now


