झूठे वादे, फर्जी रसीदें और एक मौत: दुमका पुलिस के हत्थे चढ़ा दर्जनों लोगों को चूना लगाने वाला ठग
कोर्ट के गैर-जमानती वारंट पर एक्शन:* व्यवसायियों और संवेदकों से करोड़ों की ठगी का आरोपी, कुर्की-जब्ती के आदेश के बाद घर के पिछले दरवाजे से भागते वक्त दबोचा गया।
सदमे से कांग्रेस नेता के भाई की मौत:* पैसे न मिलने और बार-बार के धोखे से गई जान; वहीं आरोपी खुद को बता रहा है बेकसूर, कहा- “मैंने लौटाए 40 लाख रुपये।”
ब्यूरो
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दुमका:उपराजधानी दुमका में करोड़ों रुपये की ठगी का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। शहर के न्यू बाबूपाड़ा इलाके के रहने वाले एक शातिर संवेदक आशित कुमार को गिरफ्तार कर लिया गया है। इस ‘नटवरलाल’ पर दर्जनों व्यवसायियों और संवेदकों को अपने जाल में फंसाकर करोड़ों रुपये की ठगी करने का गंभीर आरोप है। बृहस्पतिवार को स्थानीय लोगों और पीड़ितों ने उसे भागने की कोशिश करते हुए पकड़ा और नगर थाना पुलिस के हवाले कर दिया।
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कैसे कसा शिकंजा और कैसे हुई गिरफ्तारी?
आरोपी आशित कुमार पर स्थानीय अदालत में चेक बाउंस के कई मामले चल रहे थे। संजीव कुमार जायसवाल द्वारा 2024 में दर्ज कराए गए एक केस में सीजेएम कोर्ट ने उसके खिलाफ गैर-जमानती वारंट और कुर्की-जब्ती का आदेश जारी किया था। इसके बावजूद वह पुलिस की पकड़ से बाहर था।
बृहस्पतिवार की सुबह जब पीड़ित संतोष उर्फ मंटू कुमार साह उसे ढूंढ़ने उसके घर पहुंचे, तो आशित पिछले दरवाजे से भागने की फिराक में था। संतोष ने अपने साथियों की मदद से उसे धर दबोचा और पुलिस को सौंप दिया। थाने में उसकी गिरफ्तारी की खबर फैलते ही दर्जनों पीड़ित वहां पहुंच गए और पुलिस से कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग करने लगे।
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ठगी का शातिर तरीका: मीठी बातें और फर्जी रसीदों का जाल
पीड़ितों के मुताबिक, आशित लोगों को ठगने के लिए एक बेहद सुनियोजित तरीका अपनाता था:
* *झूठी कहानियां:* वह अचानक लोगों के पास जाता या फोन करके बताता कि ठेकेदारी के काम में परेशानी आ गई है या उसका ‘हाईवा’ (ट्रक) खराब हो गया है, जिसके लिए उसे तुरंत पैसों की जरूरत है।
* *मृदुभाषी स्वभाव और झूठा इकरारनामा:* उसका स्वभाव बहुत सरल और मृदुभाषी था, जिससे लोग आसानी से उसके झांसे में आ जाते थे। पैसे लेते समय वह स्टाम्प पेपर पर इकरारनामा लिखता था और रूपया वापस करने का तकादा करने पर चेक थमा देता था।
* *फर्जी बैंक रसीदें:* तकादा करने पर वह पीड़ितों को भरोसा दिलाता था कि पैसा उनके खाते में जमा कर दिया गया है। विश्वास जीतने के लिए वह फर्जी बैंक रसीद भेज देता था, लेकिन जब लोग बैंक जाकर अपना खाता चेक करते, तो उसमें एक भी रुपया नहीं होता था।
(हैरानी की बात यह है कि खुद आशित के बाबूपाड़ा स्थित घर पर बैंक का लोन है और उसका अपना सीसी अकाउंट भी फेल हो चुका है।)
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ठगी के सदमे में गई जान, थाने में उमड़ा पीड़ितों का दर्द
इस धोखाधड़ी ने एक परिवार को गहरे शोक में धकेल दिया है। कांग्रेस के पूर्व जिलाध्यक्ष महेश राम चंद्रवंशी ने थाने में अपनी पीड़ा जाहिर करते हुए बताया कि आशित ने उनके दिवंगत बड़े भाई रमेश राम से 8 लाख रुपये ठगे थे। उनकी भतीजी की शादी तय है, लेकिन आशित रोज पैसे लौटाने का झूठा वादा करता रहा। इस भारी धोखे और पैसे डूबने के सदमे में उनके भाई ने दम तोड़ दिया।
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*अन्य प्रमुख पीड़ित:*
* *संतोष उर्फ मंटू कुमार:* दूसरों से उधार लेकर और अपनी चीजें बंधक रखकर 5 लाख रुपये दिए।
* *संजीव जायसवाल:* जरूरत की चीजें गिरवी रखकर 5 लाख रुपये उधार दिए।
* इसके अलावा सपन कुमार साह,ओंकारनाथ मिश्र, नंदन झा, संजय हिम्मतसिहका सहित अन्य लोगों में से किसी ने 12 लाख, किसी ने 4 लाख तो किसी ने 1 लाख रुपये देने का दावा किया है।
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आरोपी की दलील: “मैंने पैसे लौटा दिए हैं”
इतने संगीन आरोपों और पुलिस हिरासत में होने के बावजूद आशित कुमार खुद को बेकसूर बता रहा है। उसका दावा है, “मैंने किसी का पैसा गबन नहीं किया है। मैं लोगों के अकाउंट में पैसे लौटा चुका हूँ। मैंने कुल 40 लाख रुपये वापस किए हैं और मुझे जानबूझकर तंग किया जा रहा है।”
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नगर थाना प्रभारी ने क्या बताया
नगर थाना प्रभारी अशोक राम ने बताया की फिलहाल आरोपी आशित कुमार को कोर्ट के पुराने वारंट के आधार पर गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है । पुलिस इस पूरे फ्रॉड नेटवर्क, बैंक खातों और पैसों के लेन-देन की गहराई से जांच कर रही है। दुमका के लोगों को अब न्यायालय से इंसाफ और अपनी खून-पसीने की कमाई वापस मिलने की उम्मीद है।
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