नई दिल्ली । केंद्र सरकार आईटी एक्ट, 2000 और इंडिया एआई गवर्नेंस गाइडलाइंस की समीक्षा कर रही है ताकि इनमें कमियों की पहचान की जा सके। सूत्रों के मुताबिक इन कमियों को दूर करने के लिए प्रस्तावित नए एआई कानून में जरूरी प्रावधान किए जाएंगे, जिस पर सरकार काम कर रही है। सूत्रों के मुताबिक सबसे अहम मुद्दों में से एक यह है कि फ्रंटियर एआई मॉडल और टूल्स विकसित करने वाली कंपनियों की जिम्मेदारी तय करने का ढांचा कैसा हो और क्या उन्हें भी सेफ हार्बर का कानूनी संरक्षण दिया जाना चाहिए। एक सरकारी अधिकारी ने कहा कि हम इस बात पर विचार कर रहे हैं कि इसका ढांचा कैसा होना चाहिए। अभी सामान्य समझ यह है कि ये सभी कंपनियां इंटरनेट इंटरमीडियरी की व्यापक श्रेणी में आती हैं, लेकिन केवल यह कहना कि वे सिर्फ एक टूल उपलब्ध कराती हैं और उस टूल से तैयार होने वाले कंटेंट के लिए जिम्मेदार नहीं हैं, उचित तर्क नहीं माना जा सकता।
सूत्रों ने बताया कि प्रस्तावित एआई कानून में सिंथेटिक मीडिया के रेगुलेशन, फ्रंटियर एआई मॉडल और टूल्स के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले डेटा पर सहमति की व्यवस्था और लार्ज लैंग्वेज मॉडल व स्मॉल लैंग्वेज मॉडल द्वारा प्रोसेस किए गए डेटा के मालिकाना हक जैसे मुद्दों पर भी चर्चा हो रही है। इस साल की शुरुआत में सरकार ने इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव की अध्यक्षता में 10 सदस्यीय एआई गवर्नेंस एंड इकोनॉमिक ग्रुप का गठन किया था। इसके अलावा एआईजीईजी के तहत टेक्नोलॉजी एंड पॉलिसी एक्सपर्ट कमेटी भी बनाई गई। टीपीईसी की अध्यक्षता इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सचिव एस कृष्णन कर रहे हैं। अप्रैल में गठित एआईजीईजी का मकसद भारत की व्यापक एआई रणनीति को भी मजबूत करना है। इसके तहत फंडिंग को ऐसे सीमित उपयोग मामलों पर केंद्रित किया जाएगा, जिनसे अगले 12 से 18 महीनों में स्पष्ट परिणाम मिल सकें। स्वास्थ्य, कृषि और शिक्षा ऐसे प्रमुख क्षेत्र हो सकते हैं, जिन्हें प्राथमिकता दी जाएगी।
विशेषज्ञों के बीच इस बात को लेकर चिंता है कि लार्ज लैंग्वेज मॉडल और क्लॉड के मॉयथोस जैसे एडवांस्ड एआई टूल्स अब पुराने सॉफ्टवेयर सिस्टम और मौजूदा डिजिटल सुरक्षा व्यवस्था में भी सेंध लगाने की क्षमता दिखा रहे हैं। एक अन्य अधिकारी ने बताया कि एआईजीईजी और टीपीईसी दोनों ने सुझाव दिया है कि एआई नियामकीय ढांचे की शुरुआत वित्तीय सेवाओं और सार्वजनिक सेवाओं जैसे अधिक प्रभाव वाले क्षेत्रों से की जानी चाहिए। यह सुझाव उन रिपोर्टों के बाद आया है, जिनमें कहा गया है कि मॉयथोस जैसे फ्रंटियर एआई मॉडल पुराने बैंकिंग सॉफ्टवेयर में खामियां और सुरक्षा कमजोरियां खोजने में सक्षम हैं, जिससे जोखिम बढ़ सकता है।
सिराज/ईएमएस 22जुलाई26


