● कई गांवों में ‘आतु मोड़े होड़’ के नेतृत्व में हो रहा है ‘कुल्हि दुरुप’
● संताल धर्म सम्मेलन को लेकर गांवों में अनूठा उत्साह
● पारंपरिक पंची-पहान में सजेंगे आदिवासी: 10 नवंबर को दुमका में सांस्कृतिक महासैलाब
ब्यूरो रिपोर्ट
दुमका। आगामी 10 नवंबर को दुमका के बिरसा मुंडा आउटडोर स्टेडियम में ऐतिहासिक संताल आदिवासी धर्म सम्मेलन सह सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन होने जा रहा है। दिसोम मांझी थान आर जाहेर थान समिति (संताल परगना प्रमंडल) द्वारा आयोजित इस सम्मेलन को लेकर रानीश्वर प्रखंड के गांवों में अभूतपूर्व उत्साह देखा जा रहा है। अपनी धार्मिक आस्था और सामाजिक एकजुटता को प्रदर्शित करने के लिए ग्रामीण पारंपरिक तैयारियों में जुट गए हैं।
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गांव-गांव में बैठकें और रणनीतियां
कार्यक्रम को भव्य बनाने के लिए रानीश्वर प्रखंड के कठलिया, गुलामशूली, डूहुमुर्गा, रखालपहाड़ी, कुरुशिला और मोहनपुर सहित कई गांवों में ‘आतु मोड़े होड़’ (पारंपरिक ग्राम अगुवा) के नेतृत्व में ‘कुल्हि दुरुप’ (ग्राम बैठक) का आयोजन किया जा रहा है। इन बैठकों में धर्म सम्मेलन में भाग लेने वाले लोगों की सूचियां तैयार की जा रही हैं, ताकि ग्रामीण भारी संख्या में एक साथ दुमका पहुंच सकें।
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अनोखा सामुदायिक सहयोग
इस धर्म सम्मेलन की सबसे अनूठी बात मरांग बुरु भक्तों का आपसी सहयोग है। ग्रामीणों ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया है कि सम्मेलन में आने वाला हर श्रद्धालु अपने साथ सहयोग स्वरूप ‘एक मुट्ठी चावल और पांच रुपये’ लेकर पहुंचेगा। इस पहल को संताल समाज में धार्मिक निष्ठा और सामुदायिक एकजुटता के एक बड़े प्रतीक के रूप में देखा जा रहा है।
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सांस्कृतिक विरासत का दिखेगा गौरव
सम्मेलन में संताल समाज की समृद्ध सांस्कृतिक पहचान की झलक देखने को मिलेगी। सभी ग्रामीणों ने पारंपरिक आदिवासी परिधानों में शामिल होने का संकल्प लिया है। कार्यक्रम में पुरुष पारंपरिक ‘पंची’ और महिलाएं ‘पंची-पहान’ पहनकर शिरकत करेंगी। ग्रामीणों का मानना है कि इस आयोजन से न सिर्फ उनकी पारंपरिक धार्मिक आस्था और भाषा-संस्कृति मजबूत होगी, बल्कि नई पीढ़ी भी अपनी गौरवशाली विरासत से जुड़ सकेगी।
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बैठक में रही दिग्गजों की मौजूदगी
तैयारियों को लेकर आयोजित की गई कुल्हि दुरुप में समाज के कई प्रबुद्ध वर्ग और ग्रामीण शामिल हुए। बैठक में मुख्य रूप से मकलू सोरेन, दिनेश सोरेन, बाबूलाल मुर्मू, बेंजामिन मुर्मू, अनिल हेम्ब्रोम, ईश्वर हेम्ब्रोम, अर्जुन मुर्मू, पलटन मुर्मू, प्रधान मुर्मू, जितेन मरांडी, अरविंद सोरेन, आदित्य टुडू, रिंकू टुडू, बिटिया हांसदा, उज्जवल हेम्ब्रोम, बोबी मरांडी, जुली बेसरा, मकुटुडू, आनंद टुडू, सुनिराम सोरेन, बिनुती सोरेन, प्रवेश हेम्ब्रोम, गुंगा टुडू, धुमह मुर्मू, श्यामलाल हांसदा, सोमलाल मरांडी, होपनी बास्की, पतामुनी हेम्ब्रोम, रूबी मरांडी, मलोती हेम्ब्रोम, दुलार हेंब्रम, मेरिशीला मरांडी, लुखी सोरेन, सुनामुनी सोरेन, बहामुनी हांसदा, मीरू हांसदा, निर्मला सोरेन, मीनू हांसदा, चन्दमुनी टुडू, छुबी मुर्मू, प्रोमिला सोरेन, गुदरह सोरेन, छोटू हांसदा, चांदनी मरांडी, राजेश मरांडी, अल्बीना बास्की और प्रियंका टुडू सहित सैकड़ों की संख्या में महिला-पुरुष उपस्थित थे।


