ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्रों की बदहाली से मौत के मुंह में जा रहे मरीज
मानसून में सांपों का आतंक तेज, 17 गंभीर मरीज आईसीयू में भर्ती, अस्पताल 24 घंटे अलर्ट मोड पर
सीएचसी की लापरवाही बन रही काल, पीजेएमसीएच में मरीजों को तुरंत मिल रहा आपातकालीन इलाज
एस.के.झा.’सुमन’
दुमका। मानसून की दस्तक के साथ ही उपराजधानी और आसपास के ग्रामीण इलाकों में सर्पदंश के मामलों में बाढ़ आ गई है। जहां एक तरफ मसलिया के आसनसोल डूहूडी गांव में संसाधनों की कमी और डॉक्टरों की लापरवाही के कारण सात वर्षीय मासूम की जान चली गई, वहीं फूलो झानो मेडिकल कॉलेज अस्पताल
मरीजों के लिए जीवनदायिनी बना हुआ है।
ग्रामीण इलाकों के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में डॉक्टरों की आपसी खींचतान, दोहरे प्रभार का खेल और एंटी-स्नेक वेनम देने में डॉक्टरों की कतराहट के कारण मरीज सीधे मौत के मुंह में धकेले जा रहे हैं। स्थानीय स्तर पर इलाज न मिलने और पीजेएमसीएच रेफर किए जाने के बीच का समय मरीजों के लिए काल बन रहा है। इसके विपरीत, दुमका का फूलो झानो मेडिकल कॉलेज अस्पताल अलर्ट मोड पर है; जून से अब तक आए सर्पदंश के सभी 62 मामलों में त्वरित आपातकालीन इलाज देकर कई जिंदगियों को सुरक्षित बचाया जा चुका है।
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उपराजधानी के प्रतिष्ठित फूलो झानो मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल के सुपरिटेंडेंट प्रोफेसर डॉ. रुबेन हेम्ब्रम से संताल एक्सप्रेस के ब्यूरो प्रभारी ने स्वास्थ्य व्यवस्था, चुनौतियों और आगामी योजनाओं को लेकर एक खास बातचीत की। प्रस्तुत हैं इस बातचीत के मुख्य अंश:
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प्रश्न : अस्पताल में रोजाना या हर महीने सर्पदंश के औसतन कितने मामले आ रहे हैं और इनमें से कितने मरीज जहरीले सांप के काटने से प्रभावित होते हैं?
उत्तर : जून से अब तक पूरे जिले से 62 मामले मेडिकल कॉलेज में पहुंचे हैं। जिसमें जहरीले सांप वाले 17 मामले आए हैं जो आईसीयू में हैं।
प्रश्न : सांप काटने के बाद अस्पताल पहुंचने के लिए शुरुआती ‘गोल्डन आवर’ (पहला घंटा) कितना महत्वपूर्ण है?
उत्तर : सांप काटने के बाद पहला घंटा यानी ‘गोल्डन आवर’ जीवन और मृत्यु के बीच की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी है। इस दौरान शरीर में जहर तेजी से फैलता है। पहले घंटे के भीतर अस्पताल पहुंचकर एंटी-वेनम मिलने से जहर का असर तुरंत रुक जाता है, जिससे अंग विफलता और मौत का खतरा न्यूनतम हो जाता है।
प्रश्न : सांप काटने के तुरंत बाद क्या सावधानी बरतनी चाहिए?
उत्तर: सांप काटने पर तुरंत घबराएं नहीं, इससे जहर तेजी से नहीं फैलेगा। पीड़ित को लिटा दें और प्रभावित अंग को बिल्कुल न हिलाएं। सूजन आने से पहले अंगूठी, घड़ी या तंग कपड़े निकाल दें। बिना समय गंवाए तुरंत नजदीकी अस्पताल ले जाएं। घाव पर चीरा न लगाएं, मुंह से जहर न चूसें और न ही पट्टी कसकर बांधें।
प्रश्न : क्या अंधविश्वास और झाड़-फूंक के चक्कर में मरीजों की स्थिति गंभीर हो जाती है?
उत्तर : झाड़-फूंक के चक्कर में कीमती समय न गंवाएं। सर्पदंश का एकमात्र सुरक्षित और प्रामाणिक इलाज केवल चिकित्सा विज्ञान है। सांप काटने पर बिना देरी किए मरीज को तुरंत नजदीकी सरकारी अस्पताल ले जाएं, जहां जीवन रक्षक एंटी-स्नेक वेनम इंजेक्शन मुफ्त और पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध होते हैं।
प्रश्न: अस्पताल में एंटी-स्नेक वेनम का कितना स्टॉक उपलब्ध है? स्टॉक खत्म होने की स्थिति में दवा मंगाने की क्या व्यवस्था है?
उत्तर : अभी 588 एंटी-स्नेक वेनम उपलब्ध है । स्टॉक खत्म होने से पहले ही 2000 एंटी-स्नेक वेनम का डिमांड कर दिया गया है।
प्रश्न : क्या आपातकालीन वार्ड में प्रशिक्षित डॉक्टर और वेंटिलेटर की सुविधा 24 घंटे उपलब्ध है?
उत्तर : अस्पताल के आपातकालीन वार्ड में 24 घंटे निरंतर वेंटिलेटर सुविधा चालू है। हमारे डॉक्टरों की टीम 10 तारीख से रांची में 3 दिवसीय आधुनिक चिकित्सा प्रशिक्षण पर है। इस दौरान मरीजों की देखभाल के लिए विशेषज्ञ डॉक्टरों की वैकल्पिक टीम तैनात की गई है।
प्रश्न : यदि कोई केस अत्यधिक गंभीर है या न्यूरोटॉक्सिक है, तो क्या उसे बड़े मेडिकल कॉलेज या हायर सेंटर रेफर करने की व्यवस्था है या यहाँ की सुविधाओं में सुधार की जरूरत है?
उत्तर : गंभीर या न्यूरोटॉक्सिक मामलों में समय ही जीवन है। यदि मरीज सही समय पर अस्पताल पहुँच जाए, तो अधिकांश मामलों का इलाज हमारी मौजूदा सुविधाओं से यहीं संभव है। हालांकि, आपातकालीन प्रबंधन को और अधिक मजबूत बनाने तथा रेफरल की जरूरत को कम करने के लिए स्थानीय स्तर पर चिकित्सा सुविधाओं में निरंतर सुधार और विस्तार की आवश्यकता हमेशा बनी रहती है।
प्रश्न : बरसात में सर्पदंश के बढ़ते मामलों पर आपके स्तर से क्या जागरूकता फैलाई जाती है?
उत्तर: मेडिकल कॉलेज होने के नाते हमारे यहाँ से सीधा जागरूकता अभियान नहीं चलता, बल्कि जिला प्रशासन और विभिन्न प्रखंडों के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को जागरूक किया जाता है।
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पीजेएमसीएच में सर्पदंश जून से अब तक 62 मरीज पहुंचे अस्पताल, 17 आईसीयू में भर्ती
वार्ड के अनुसार मरीजों की स्थिति पर एक नजर
* कैजुअल्टी (आपातकालीन वार्ड): 38 मरीज
* आईसीयू (गहन चिकित्सा इकाई): 17 मरीज (गंभीर स्थिति)
* मेडिसिन वार्ड (पुरुष): 04 मरीज
* मेडिसिन वार्ड (महिला): 03 मरीज
* कुल मामले: 62
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जानिए आपके ब्लॉक के किस सरकारी अस्पताल में कितनी उपलब्ध है एंटी-स्नेक वेनम
* दुमका सदर – 288
* जरमुंडी – 240
* जामा – 96
* सरैयाहाट – 192
* रामगढ़ – 331
* काठीकुंड – 196
* मसलिया – 72
* रानीश्वर – 144
* शिकारीपाड़ा – 343
* गोपीकांदर – 96


