जरमुंडी | राजकीय श्रावणी मेला के 11 वें दिन गुरूवार को भी नागेश ज्योतिर्लिंग पर जलाभिषेक करने के लिए श्रद्धालुओं का जनशैलाब बासुकीनाथ धाम में उमड़ा। देश विदेश से बड़ी संख्या में कांवरिया श्रद्धालु बाबा बासुकीनाथ धाम पवित्र जलार्पण के लिए पहुंच रहे हैं। सावन कृष्ण द्वादशी, प्रदोष तिथि पर गुरुवार को शाम 5 बजे तक 75126 श्रद्धालुओं ने बाबा फौजदारी नाथ पर जलार्पण किया। बासुकीनाथ मंदिर कार्यालय से मिली जानकारी के मुताबिक श्रावणी मेला के 11वें दिन सामान्य रूट लाईन से कतारबद्ध होकर 65572 श्रद्धालुओं ने तथा 3754 श्रद्धालुओं ने शीघ्रदर्शनम से जलार्पण किया। वहीं बासुकीनाथ मंदिर कार्यालय से 300 रूपये के कूपन प्राप्त कर 3754 श्रद्धालुओं ने सीधे मंदिर में प्रवेश कर शीघ्रदर्शनम की सुविधा से जलाभिषेक किया। इसी प्रकार असमर्थ और बीमार, वृद्ध सरीखे श्रद्धालु, जो लाईन लगकर पूजा करने में असमर्थ थे। वैसे 5800 कुल 75126 श्रद्धालुओं ने शिवगंगा घाट और सिंहद्वार कीर्तनशाला में बने जलार्पण काऊंटर से पवित्र जल डालकर भगवान बासुकीनाथ को जलार्पण किया। यह जल जलार्पण काऊंटर से पाईप लाईन द्वारा सीधे बासुकीनाथ मंदिर के गर्भगृह में जाकर नागेश ज्योतिर्लिंग पर गिरता है। गुरुवार को श्रद्धालुओं ने जलार्पण काऊंटर से जल अर्पित करने के बाद एलईडी स्क्रीन पर भोलेनाथ बाबा बासुकीनाथ का लाईव दर्शन किया। बता दें कि गुरुवार को श्रावणी मेला के 11वें दिन पवित्र जलाभिषेक करने के लिए श्रद्धालु रात्रि के एक बजे से ही कांवरिया कतार में जुटने लगे थे। रात्रि के करीब 2 : 21 पूर्वाह्न पर बाबा बासुकीनाथ मंदिर के कपाट खुले और साफ सफाई होने के बाद नागेश ज्योतिर्लिंग की षोडशोपचार विधि से सरकारी प्रभात पूजा संपन्न हुई। सरकारी पूजा के बाद पंडा पुरोहितों और कांचा जल पूजन किया। इसके बाद तड़के सुबह 3 :21 पूर्वाह्न से श्रद्धालुओं के लिए बासुकीनाथ मंदिर को खोल दिया गया। अहले सुबह से दिन भर पूजा अर्चना जारी रही।कांवरियों की भीड़ से कांवरिया कतारें अविरल गंगा की धारा के रूप में प्रवाहित होती प्रतीत हुई। मानों मां गंगा केसरियामयी धारा बनकर नागेश ज्योतिर्लिंग का सतत आभिषेक करने निरंतर बासुकीनाथ मंदिर की ओर प्रवाहित हो रही थी। कांवरियों की आस्था का यह प्रवाह शाम पांच बजे तब जाकर करीब एक घंटे के लिए थमा।जब भोलेनाथ की दिवाकालीन विश्राम पूजा हुई। दिनभर भक्तों की पूजा अर्चना के बाद एक घंटे भोलेनाथ को विश्राम देने हेतु मंदिर के कपाट बंद किए गए। शाम 6:00बजे फिर से मंदिर के कपाट खुले।तब कांवरियों ने पुनः भोलेनाथ पर पवित्र जल अर्पित करना शुरू किया। यह क्रम रात्रिकालीन श्रृंगार पूजन तक निर्बाध रूप से जारी रहा।
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बाबा बासुकीनाथ मंदिर को हुई 14.23 लाख रूपये की आय
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वहीं शीघ्रदर्शनम के 3754 कूपन से 11,26,200 रूपये व गोलक से 80836 रूपये एवं अन्य स्रोत से 12354 रूपये समेत कुल 1423486 रूपये की नगद आमदनी हुई है।
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