लखनऊ । उत्तर प्रदेश के गौतमबुद्ध नगर जिले की एक विशेष पॉक्सो कोर्ट ने न्याय की मिसाल पेश करते हुए 68 वर्षीय एक बुजुर्ग को बलात्कार के कथित आरोपों से बरी कर दिया है। यह फैसला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि आरोपी ने अपने जीवन के 10 बेशकीमती साल जेल की सलाखों के पीछे सिर्फ एक झूठे आरोप के कारण बिता दिए। विकास नगर स्थित अतिरिक्त सत्र न्यायालय ने फैसला सुनाते हुए सख्त टिप्पणी की और कहा कि यह पूरा मामला केवल दुर्भावना से प्रेरित था और अभियोजन पक्ष मामले की बुनियादी बातों को साबित करने में भी पूरी तरह विफल रहा।
यह मामला अगस्त 2016 का है, जब नोएडा के सेक्टर 20 थाने में एक युवती के पिता ने अपहरण और बलात्कार की एफआईआर दर्ज कराई थी। पुलिस ने जांच के बाद दो लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। इनमें से एक आरोपी को कार्यवाही के दौरान नाबालिग पाया गया, जिसके बाद उसका मामला किशोर न्याय बोर्ड को भेज दिया गया। वहीं, बिहार के मूल निवासी दूसरे बुजुर्ग आरोपी का मुकदमा स्पेशल कोर्ट में चलता रहा। अभियोजन पक्ष ने पीड़िता, उसके माता-पिता और डॉक्टर सहित पांच गवाह पेश किए, लेकिन वे कोर्ट में टिक नहीं सके। बचाव पक्ष के वकीलों ने कोर्ट में ठोस तर्क दिए कि जिस समय की यह घटना बताई जा रही है, उस दौरान आरोपी नोएडा में मौजूद ही नहीं था, वह अपनी बीमार मां की देखभाल के लिए बाहर गया हुआ था। सबसे चौंकाने वाला खुलासा तब हुआ जब यह बात सामने आई कि इस पूरे मामले के पीछे संपत्ति का विवाद था। कोर्ट ने पाया कि एफआईआर जिस व्यक्ति की लिखावट में दर्ज थी, उसका आरोपी के साथ लंबे समय से कानूनी और संपत्ति संबंधी विवाद चल रहा था। न्यायाधीश ने गौर किया कि शिकायतकर्ता ने इस शत्रुता को छिपाने की कोशिश की, लेकिन बचाव पक्ष द्वारा पेश किए गए दस्तावेजों ने साजिश की पोल खोल दी। चिकित्सकीय जांच की रिपोर्ट ने भी मामले को संदिग्ध बना दिया। घटना के महज एक दिन बाद हुई मेडिकल जांच में न तो यौन उत्पीड़न की पुष्टि हुई और न ही शरीर पर कोई चोट के निशान मिले। यहाँ तक कि डॉक्टर ने गवाही दी कि यौन हमले के बारे में कोई निश्चित राय नहीं दी जा सकती। इसके अलावा, अभियोजन पक्ष लड़की के नाबालिग होने का कोई भी आधिकारिक प्रमाण नहीं दे सका। मुख्य चिकित्सा अधिकारी की रिपोर्ट के अनुसार लड़की की आयु 18 से 22 वर्ष के बीच पाई गई। इन तमाम तथ्यों और सबूतों के अभाव को देखते हुए कोर्ट ने माना कि आरोपी को झूठे जाल में फंसाया गया था और उसे तत्काल रिहा करने के आदेश दिए।
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