संताल एक्सप्रेस
दुमका। संताली साहित्यकार निर्मला मुर्मू ‘पुतुल’ ने महिला आरक्षण बिल के लोकसभा में गिरने पर अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि परिसीमन के बहाने महिला आरक्षण बिल लाने की कोशिश की गई, जो एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा था। इसी चालाकी के कारण यह विषय विवादित स्थिति में पहुंच गया है। यदि वास्तव में महिलाओं को आरक्षण देना ही उद्देश्य होता, तो राजनीतिक दलों को पहले अपने-अपने संगठन के भीतर इसकी ठोस तैयारी करनी चाहिए थी, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। निर्मला मुर्मू ‘पुतुल’ ने कहा कि सत्ता पक्ष बिना व्यापक सहमति और तैयारी के जल्दबाजी में महिला आरक्षण बिल पास करना चाहता था, जिससे उनके राजनीतिक क्षेत्र के विस्तार का उद्देश्य झलकता है। हालांकि, यह मंशा पूरी तरह सफल नहीं हो पाई।उन्होंने कहा कि इस बिल के पारित हो से वास्तविक लाभ केवल सत्ता पक्ष को मिलता, जो उनके इरादों में स्पष्ट दिखाई देता है।निर्मला पुतुल ने कहा कि यह निर्विवाद है कि महिलाओं को आरक्षण मिलना चाहिए, क्योंकि वे समाज की आधी आबादी हैं और हर क्षेत्र में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। लेकिन इसके साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाना आवश्यक है कि पिछड़े, दलित, शोषित और आदिवासी वर्ग की महिलाओं को भी इस आरक्षण में समुचित भागीदारी मिले।
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