नई दिल्ली । आतंकी हमले पर आधारित एक फिल्म की रिलीज पर सुनवाई के दौरान सर्वोच्च न्यायालय ने पुरी के जगन्नाथ मंदिर प्रशासन की ओर से भगवान जगन्नाथ से जुड़े धार्मिक प्रसंगों पर उठाई गई आपत्तियों पर गंभीर टिप्पणी की है। अदालत ने कहा कि यदि इसी प्रकार की संवेदनशीलता और आपत्तियां हर धार्मिक प्रसंग पर लागू की जाएं, तो भविष्य में देवी-देवताओं और पौराणिक कथाओं पर आधारित फिल्मों तथा टीवी धारावाहिकों के निर्माण की अनुमति देना कठिन हो जाएगा। धार्मिक मामलों की फिल्मों में स्थाई रोक लगाने की जरूरत पड़ जाएगी। न्यायालय ने संकेत दिया कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और धार्मिक भावनाओं के बीच संतुलन रखना आवश्यक है। किसी भी कृति का मूल्यांकन उसके समग्र संदर्भ में किया जाना चाहिए। अदालत ने स्पष्ट किया केवल आशंका या भावनात्मक आपत्ति के आधार पर किसी फिल्म पर रोक लगाने का आधार नहीं बनता है । सुनवाई के दौरान न्यायालय ने संबंधित पक्षों के तर्क सुने, न्यायमूर्ति ने कहा, धार्मिक विषयों पर रचनात्मक अभिव्यक्ति के मामलों में संतुलित दृष्टिकोण अपनाना आवश्यक है। सर्वोच्च न्यायालय की इस टिप्पणी को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, धार्मिक आस्था और रचनात्मक स्वतंत्रता के बीच संतुलन स्थापित करने के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बहस के दौरान यह भी बात सामने आई भारत और दुनिया में कई रामायण हैं उसमे अलग-अलग तथ्य हैं। सब की संवेदना भी अलग-अलग हैं।
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