झामुमो में हेमंत सोरेन जिसे चाहेंगे उसकी खुलेगी किस्मत
कांग्रेस और राजद में फंसा है नामों का पेच
चंदन मिश्र
झारखंड में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अगुवाई वाली इंडिया गठबंधन की सरकार गुरुवार को बन गई। हेमंत सोरेन ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ले ली, लेकिन उनके साथ किसी और मंत्री ने शपथ नहीं ली। झारखंड में विधानसभा के कुल सदस्य संख्या के अनुसार मुख्यमंत्री समेत कैबिनेट में कुल 12 मंत्री होते हैं। सरकार गठन के अभी तक के तय फार्मूले में प्रति चार विधायक पर एक मंत्री बनाने का है। किंतु यह व्यवहार में संभव नहीं हो सकता है। यदि ऐसा होगा तो झामुमो को 34 विधायकों में कम से कम आठ कैबिनेट मंत्री चाहिए होंगे। कांग्रेस के 16 विधायकों में चार कैबिनेट मंत्री होंगे। इतने में 12 कैबिनेट मंत्रियों का कोटा पूरा हो जाता है। लेकिन इस फार्मूले में राजद और वामदल को कैबिनेट में कोई बर्थ नहीं मिल पाएगा। किंतु गठबंधन धर्म का तकाजा है कि गठबंधन के सभी साथियों को उनका हक मिले। इसलिए जब तक साथी दलों की ओर से कोई अंतिम निर्णय और नाम नहीं मिल जाते हैं, तब तक कैबिनेट का गठन नहीं हो पाएगा। गठबंधन के प्रमुख घटक दल कांग्रेस और राजद ने अभी तक मंत्रियों का नाम नहीं तय किया है। उधर वाम दल भी अभी तक कैबिनेट के लिये कोई नाम तय नहीं किया है। इस तरह झामुमो को छोड़ गठबंधन के तीनों दलों में नाम को लेकर पेच फसा हुआ है। इस संबंध में कांग्रेस द्वारा नाम तय नहीं किये जाने के कारण राजद भी अपना पत्ता नहीं खोल रहा है। सबसे पेंचिदा मामला कांग्रेस से जुड़ा है। कांग्रेस के 16 विधायक चुनकर आए हैं। इनमें से निर्धारित कोटे के हिसाब से चार को कैबिनेट में जगह मिलनी है। लेकिन मंत्री बनने की लालसा सभी 16 विधायकों में है। अब कांग्रेस नेतृत्व को यह तय करना कठिन लग रहा है कि किसे चुने, किसे छोड़े। चार को चुनने के बाद कम से कम आठ विधायक नाराज होंगे। इसलिए केंद्रीय नेतृत्व के सामने चार विधायकों का चुनाव आसान काम नहीं है। लेकिन मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन चाहेंगे कि उनके कैबिनेट का गठन जल्द से जल्द हो जाए। उन्होंने विधानसभा सत्र की तारीख तय कर ली है। कैबिनेट का गठन हो जाए और सरकार का कामकाज जल्द हो मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन यही चाहेंगे। इसलिए कांग्रेस और अन्य साथी दलों को जल्द से जल्द अपना फैसला मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को बता देना होगा। कैबिनेट गठन का मामला लंबा खिंचा तो हेमंत सोरेन सरकार की ओर से अच्छा संदेश नहीं जाएगा। राज्य को हेमंत सोरेन सरकार के नए तेवर और कलेवर देखना है।


