राज्य और राजनीति
– सीट बंटवारे पर शुरू नहीं हुई बात
– सभी को चाहिए ज्यादा हिस्सेदारी
– झामुमो व कांग्रेस के बीच ठन चुकी है रार
– राजद और वामदलों के दिल भी मांगें मोर
चंदन मिश्र
झारखंड विधानसभा के चुनाव की आरंभिक तैयारियों में सभी दलों ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। सत्तारूढ़ और विपक्षी दलों की लगातार जनसभाएं हो रही हैं। सत्ता पक्ष सरकार की योजनाओं को लेकर वोटरों को लुभाने में लगा है। दूसरी ओर विपक्षी दल अपनी भावी योजनाओं को लेकर सामने आ रहे हैं। साथ ही सरकार की लानत सलामत भी करने में पीछे नहीं है। घुसपैठियों को लेकर भी लगातार मुद्दा खड़ा हुआ है। विपक्षी दलों में भाजपा, आजसू और जदयू के बीच सीटों का सैद्धांतिक बंटवारा हो चुका है। इसकी औपचारिक घोषणा बाकी है, ऐसा भाजपा के लिए झारखंड के सह चुनाव प्रभारी और असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने मीडिया से कही है। केवल एक दो सीटों को लेकर आजसू के साथ फाइनल बात होनी है। लेकिन इसके ठीक उलट सत्तारूढ़ दलों के बीच अभी तक सीट बंटवारे को लेकर नेताओं की कोई औपचारिक बैठक भी नहीं हुई है। झामुमो महागठबंधन में अभी सबसे बड़ा दल है और अपने सहयोगी दलों कांग्रेस, राजद तथा वामदलों को अपनी हैसियत में रहने की नसीहत दी है। पिछले दिनों कांग्रेस के झारखंड प्रभारी मीर रांची में अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं की बैठक ले रहे थे। इसी बैठक में मीर ने कह दिया कि पार्टी कार्यकर्ता
30-35 सीटें जीतकर आएं, फिर रोटेशन में कांग्रेस का भी मुख्यमंत्री बनेगा। इतनी बात कहनी थी कि झामुमो के महासचिव और केंद्रीय प्रवक्ता सुप्रियो भट्टाचार्य ने कांग्रेस को घुड़की दे दी। सुप्रियो ने कहा, कांग्रेस इस मुगालते में न रहे, वरना झामुमो कार्यकर्ता सभी 81 सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी कर चुके हैं। फिर कांग्रेस अपना देख ले। झामुमो के इस कड़े तेवर के लिए कांग्रेस नेता बिलकुल तैयार नहीं थे। कांग्रेस प्रभारी मीर और अध्यक्ष केशव महतो कमलेश अपनी ओर से सफाई देने मुख्यमंत्री और झामुमो के बॉस हेमंत सोरेन के पास पहुंच गए। मीर ने सफाई दे दी, वह तो अपने कार्यकर्ताओं का मोरल बूस्ट अप कर रहे थे। लेकिन सुप्रियो भट्टाचार्य ने इसे दूसरे ढंग से ले लिया। यह तो बयानबाजी की बात हुई, लेकिन इसके इतर अभी कौन दल कितनी सीटों पर लड़ेगा, यह तय नहीं हो पाया है।
सीट के सबके अपने-अपने दावे
झामुमो, कांग्रेस और राजद के बीच सीट बंटवारे के लिए अभी तक कोई औपचारिक बैठक भी नहीं हुई है। सीटों को लेकर सभी दलों के अपने अपने दावे हैं। झामुमो, कांग्रेस, राजद और वामदल ने अलग-अलग बैठक कर अधिक से अधिक सीटों पर लड़ने का फैसला लिया है। झामुमो अभी तक ‘ बिग बॉस ‘ की तरह पेश आ रहा है। झामुमो ने पिछली बार 43 सीटों पर लड़कर 30 सीटों पर जीत हासिल की थी। कांग्रेस ने 31 सीटें लड़कर 16 सीटें जीती। राजद को सात सीटें दी गई थी। राजद ने सिर्फ चतरा की एक सीट पर जीत हासिल की थी।
लेकिन इस बार झामुमो,कांग्रेस और राजद के अलावा वाम दल भी महागठबंधन के साथ आएगा। मार्क्सवादी समन्वय समिति(मासस) का भाकपा माले में विलय हो चुका है। जाहिर है कि दोनों दल इस बार अपने -अपने प्रभाव वाले क्षेत्र की सीटों की दावेदारी करेंगे। मासस का धनबाद के निरसा और सिंदरी विधानसभा क्षेत्र की दावेदारी बनती है। भाकपा माले बगोदर और गिरिडीह की राजधनवार सीट पर दावा करेगी। फिलहाल यह अभी महागठबंधन की थैली के अंदर का रहस्य है। थैली खुलेगी तब हकीकत सामने आएगा।
छोटे दलों के अरमान बड़े
झामुमो इस बार अधिकतम सीटों पर लड़ने की तैयारी कर रहा है। झामुमो का हौसला बुलंद है। लोकसभा में एक से तीन सीटें जीतने के बाद अपने वोटर, सरकार की नीतियां, कार्यक्रम और नेतृत्व पर पूरा भरोसा है। लेकिन कांग्रेस भी पीछे नहीं रहना चाहती है। कांग्रेस पिछली बार से ज्यादा, कम से कम 33 से 35 सीटें लड़ना चाहेगी। ऐसा कांग्रेस ने दावा भी किया है। लेकिन सबसे जटिल समस्या खड़ी होगी, जब राजद और वाम दल ज्यादा सीटों की मांग करेंगी। राजद के नेताओं ने डेढ़ दर्जन सीटों पर लड़ने की बात कही है। वहीं मासस के भाकपा माले के साथ विलय के बाद दस से ज्यादा सीटें लड़ने की बात कही है। बंटवारे के फार्मूले में यदि झामुमो और कांग्रेस के हिस्से 70 से ज्यादा सीटें आएंगी, तब राजद और वामदलों के हिस्से बहुत ही कम सीटें रह जाएंगी। ऐसे में छोटे दल नाराज हो सकते हैं। इन दलों की नाराजगी दूर करने के लिए झामुमो और कांग्रेस को अपने हिस्से की सीटें घटानी होंगी। महागठबंधन के सभी दल जब सीटों के बंटवारे के लिए बातचीत के टेबल पर बैठेंगे तभी असली तस्वीर सामने आएगी। फिर भी इतना तो तय है कि महागठबंधन में सीटों का बंटवारा इतना आसान नहीं होगा। सभी दलों की उम्मीदें बढ़ी हुई हैं।
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