नई दिल्ली । मोबाइल और कंप्यूटर के इस दौर में हाथ से लिखने का चलन धीरे-धीरे कम हो रहा है। इसका सीधा असर हमारी लिखने की आदत पर भी पड़ा है। हालांकि, विशेषज्ञों और शोध के मुताबिक हाथ से लिखना सिर्फ एक पुरानी आदत नहीं है, बल्कि इसका संबंध दिमाग की सक्रियता, एकाग्रता और सीखने की प्रक्रिया से भी हो सकता है।
एक शोध के अनुसार, टाइपिंग की तुलना में हाथ से लिखते समय आंख, हाथ और दिमाग एक साथ सक्रिय होते हैं। इस दौरान दिमाग के अलग-अलग हिस्सों के बीच अधिक कनेक्टिविटी देखने को मिलती है। शोध में संकेत मिलता है कि लिखने की प्रक्रिया सीखने और जानकारी को याद रखने में मदद कर सकती है। हाथ की गतिविधियों और सोच के बीच बनने वाला तालमेल दिमाग के लिए एक तरह की मानसिक कसरत की तरह काम कर सकता है। मनोवैज्ञानिकों के मुताबिक हाथ से लिखने की प्रक्रिया व्यक्ति को अपने विचारों पर अधिक ध्यान केंद्रित करने का अवसर देती है। जब हम किसी बात को कागज पर लिखते हैं तो विचारों को व्यवस्थित करने और उन्हें शब्दों में व्यक्त करने की प्रक्रिया भी साथ चलती है। यही वजह है कि डायरी लिखना या अपनी भावनाओं और विचारों को कागज पर उतारना आत्मविश्लेषण में मददगार माना जाता है। इससे व्यक्ति अपनी प्राथमिकताओं और भावनाओं को बेहतर ढंग से समझने की कोशिश कर सकता है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, हाथ से लिखने के दौरान हाथ और दिमाग एक साथ काम करते हैं। इससे मसल मेमोरी और कॉग्निटिव फंक्शन को सक्रिय रखने में मदद मिल सकती है। पेन और पेपर से लिखने का अनुभव मोबाइल या कंप्यूटर पर टाइप करने से अलग होता है। विशेषज्ञों का मानना है कि हाथ से लिखते समय व्यक्ति जानकारी से अधिक गहराई से जुड़ सकता है, जिससे सीखने और समझने की प्रक्रिया को मदद मिल सकती है। तकनीक पर बढ़ती निर्भरता के कारण चिट्ठी लिखना, डायरी बनाना और जरूरी बातें नोटबुक में दर्ज करना जैसी आदतें भी कम हुई हैं। अब इनकी जगह मोबाइल और कंप्यूटर ने ले ली है। ऐसे में रोजमर्रा की जिंदगी में कुछ समय पेन और पेपर के लिए निकालना दिमाग को सक्रिय रखने की उपयोगी आदत हो सकती है।
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