● दुमका इंजीनियरिंग कॉलेज ने शानदार प्रदर्शन करते हुए राष्ट्रीय स्तर पर लगभग 18,000 संस्थानों के बीच टॉप 100 में बनाई अपनी जगह
● महानगरीय केंद्रों से दूर स्थित होने के बावजूद, छात्रों के लिए एक बेहतरीन उद्यमशील और नवाचार इकोसिस्टम तैयार करने में संस्थान को मिली बड़ी कामयाबी
● यह उपलब्धि स्थानीय चुनौतियों का स्वदेशी तकनीक से समाधान निकालने, रोजगार सृजन करने और ज्ञान-आधारित अर्थव्यवस्था में योगदान देने का बनेगी प्रभावी माध्यम
ब्यूरो
दुमका: दुमका इंजीनियरिंग कॉलेज ने नवाचार, उद्यमिता और स्टार्टअप विकास के क्षेत्र में एक उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल करते हुए भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय की इंस्टीट्यूशन इनोवेशन काउंसिल के अंतर्गत आईआईसी कैलेंडर वर्ष 2024-25 के लिए चार-सितारा रेटिंग प्राप्त की है। यह इस वर्ष भारत में प्राप्त सर्वोच्च रेटिंग है, जो दुमका इंजीनियरिंग कॉलेज को झारखंड में नवाचार, उद्यमिता और प्रौद्योगिकी-आधारित विकास के एक अग्रणी केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। संस्थान के अनुसार, राष्ट्रीय स्तर पर लगभग 18,000 संस्थानों के बीच दुमका इंजीनियरिंग कॉलेज ने यह सर्वोच्च आईआईसी रेटिंग प्राप्त की है, जबकि स्टार्टअप और नवाचार प्रदर्शन के मामले में इसे शीर्ष 100 संस्थानों में स्थान मिला है। यह उपलब्धि कॉलेज प्रशासन, संकाय सदस्यों, छात्रों और इंस्टीट्यूशन इनोवेशन काउंसिल के उन सामूहिक प्रयासों को दर्शाती है, जिन्होंने ऐसा पारिस्थितिकी तंत्र विकसित किया है जहाँ नवोन्मेषी विचारों को व्यावहारिक समाधानों में परिवर्तित किया जा सके।
निदेशक डॉ. सुदीप्त चक्रवर्ती ने इस उपलब्धि पर पूरे कॉलेज समुदाय को बधाई दी और इसे संस्थान के निरंतर प्रयासों की एक महत्वपूर्ण मान्यता बताया। उन्होंने जोर दिया कि कॉलेज स्टार्टअप, प्रौद्योगिकी विकास, उद्योग सहयोग और उद्यमिता के लिए अपने समर्थन को मजबूत करता रहेगा, ताकि परिसर में उत्पन्न नवोन्मेषी विचार समाज में सार्थक योगदान दे सकें। वहीं, प्राचार्य डॉ. गणेश शंकर ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि यह उपलब्धि दर्शाती है कि प्रमुख महानगरीय केंद्रों से बाहर स्थित संस्थान भी छात्रों और संकाय सदस्यों को उचित वातावरण प्रदान कर राष्ट्रीय स्तर का नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र विकसित कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि कॉलेज छात्रों को पारंपरिक पढ़ाई से आगे बढ़ने और कृषि, ऊर्जा, स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा, पर्यावरण तथा ग्रामीण विकास जैसे क्षेत्रों की चुनौतियों का समाधान करने के लिए प्रोत्साहित करता रहेगा।
उप-प्राचार्य डॉ. रतन कुमार बोस ने छात्रों के बीच नवाचार-उन्मुख शैक्षणिक संस्कृति विकसित करने के महत्व पर प्रकाश डाला और कहा कि यह उपलब्धि छात्रों को अपने आस-पास की समस्याओं की पहचान करने और उन्हें करियर विकल्प के रूप में तलाशने के लिए प्रेरित करेगी। आईआईसी अध्यक्ष प्रो. पंकज सरकार ने निरंतर सहयोग के लिए आभार व्यक्त करते हुए स्पष्ट किया कि उद्देश्य केवल रेटिंग प्राप्त करना नहीं है, बल्कि एक ऐसा वातावरण बनाना है जिसमें छात्र विचार उत्पन्न करने, प्रोटोटाइप विकसित करने, बौद्धिक संपदा की सुरक्षा करने और स्टार्टअप स्थापित करने के लिए प्रोत्साहित हों। इस मान्यता से दुमका इंजीनियरिंग कॉलेज में स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र को महत्वपूर्ण गति मिलने की उम्मीद है, जिससे छात्र अपनी शैक्षणिक परियोजनाओं को व्यावसायिक रूप से उपयोगी उत्पादों में परिवर्तित कर सकेंगे।
संस्थागत नवाचार का अंतिम उद्देश्य केवल रैंकिंग या मान्यता तक सीमित नहीं है, बल्कि एक सशक्त नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र रोजगार सृजन, आर्थिक वृद्धि और सामाजिक परिवर्तन का प्रभावी माध्यम बन सकता है। ऐसे पारिस्थितिकी तंत्र से उभरने वाले स्टार्टअप स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप प्रौद्योगिकियां विकसित कर सकते हैं और आत्मनिर्भर भारत तथा ज्ञान-आधारित अर्थव्यवस्था के व्यापक उद्देश्यों में योगदान दे सकते हैं। दुमका इंजीनियरिंग कॉलेज ने इस सफलता को आगे बढ़ाते हुए खुद को नवाचार, स्टार्टअप, प्रौद्योगिकी और सामाजिक विकास के लिए एक अधिक सशक्त क्षेत्रीय एवं राष्ट्रीय केंद्र के रूप में स्थापित करने का संकल्प व्यक्त किया है।


