बोले: विद्यार्थी की सफलता में अभिभावकों, शिक्षकों और समाज का विशेष योगदान
सभी से देश की प्रगति में अपने प्रयासों को समर्पित करने का राजपाल ने किया आह्वान
एस.के. झा ‘सुमन’
दुमका। शहर के कन्वेंशन सेंटर में मंगलवार को सिदो कान्हू मुर्मू विश्वविद्यालय का आठवां दीक्षांत समारोह हुई। इस मौके पर राज्यपाल ने एक स्मारिका का भी लोकार्पण किया।वही विशिष्ट अतिथि प्रो क्षिति भूषण दास के द्वारा भी मेधावी छात्रों को मेडल और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया। कार्यक्रम की शुरुआत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो बिमल प्रसाद सिंह ने विश्वविद्यालय के स्मारक टिल्हा स्थित वीर सिदो कान्हू मुर्मू की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर की। इसके बाद जैसे ही महामहिम राज्यपाल व विशिष्ट अतिथि कार्यक्रम स्थल पर पहुंचे तो उनका पारंपरिक लोटा-पानी से स्वागत किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत शैक्षणिक जुलूस की रैली के साथ हुई और उसी रैली के साथ कुलाधिपति, विशिष्ट अतिथि, कुलपति, रजिस्ट्रार, परीक्षा नियंत्रक एवं विभिन्न संकाय के संकायाध्यक्ष मंच पर पहुंचे। मंच पर पहुंचने पर राष्ट्रगान व कुलगीत के बाद महामहिम राज्यपाल व विशिष्ट अतिथि का स्वागत विवि के कुलपति प्रो बिमल प्रसाद सिंह ने पुष्पगुच्छ, शॉल व स्मृति चिह्न देकर किया किया।मुख्य अतिथि राज्यपाल सह कुलाधिपति संतोष कुमार गंगवार ने दीक्षांत समारोह में यूजी व पीजी के 63 टॉपर्स को गोल्ड मेडल सहित सहित 139 को उपाधि दी गई । 76 शोधार्थियों को पीएचडी की उपाधि दी गई। कुलाधिपति सह राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने अपने संबोधन में शैक्षणिक उपाधि प्राप्त करनेवाले छात्र-छात्राओं को उज्जवल भविष्य को लेकर शुभकामनायें दी।
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विद्यार्थी की सफलता में परिवार और समाज के लिए गर्व का विषय
राज्यपाल ने अपने संबोधन में कहा कि यह दीक्षांत समारोह विद्यार्थियों के कठिन परिश्रम और समर्पण का प्रतीक है, साथ ही इसमें उनके अभिभावकों, शिक्षकों और समाज का भी योगदान है। यह गर्व का अवसर न केवल विद्यार्थियों के लिए, बल्कि उनके परिवार और समाज के लिए भी है।
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सिदो-कान्हु का संघर्ष ने पूरे देश को स्वतंत्रता के लिए प्रेरित किया
राज्यपाल ने महान स्वतंत्रता सेनानी सिदो- कान्हु के योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत माता के इन वीर सपूतों ने ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ ‘संथाल विद्रोह’ का नेतृत्व किया, जिसे ‘हूल क्रांति’ भी कहा जाता है। उन्होंने कहा कि सिदो-कान्हु ने न केवल संथाल जनजाति के अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष किया, बल्कि उनके इस संघर्ष ने पूरे देश को स्वतंत्रता के लिए प्रेरित किया। उनके बलिदान और नेतृत्व से यह सिखने को मिलता है कि अन्याय के खिलाफ आवाज उठाना और समाज के अधिकारों की रक्षा करना हमारी नैतिक जिम्मेदारी है।
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आज का युवा, भारत के कल को बनाने में मदद करेगा: प्रो क्षिति भूषण दास
विशष्ट अतिथि के रूप में दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए झारखण्ड केन्द्रीय विश्वविद्यालय रांची के कुलपति प्रो क्षिति भूषण दास ने कहा कि आज का युवा, भारत के कल को बनाने में मदद करेगा।उन्होंने यह भी कहा कि छात्रों का सकारात्मक दृष्टिकोण और ऐसा दृष्टिकोण जो केवल किताबी ज्ञान तक सीमित न हो, समय की मांग है।उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आत्मनिर्भर भारत मिशन के माध्यम से भारत को आत्मनिर्भर बनाने की आकांक्षाओं पर चर्चा की, ताकि हमें जीवन के किसी भी क्षेत्र में किसी अन्य देश पर निर्भर न होना पड़े। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “पंच प्रण” पर भी बात की। उन्होंने संथाल और संथाल परगना की संभावनाओं के बारे में जोर दिया, चाहे वह जड़ी-बूटी, प्राकृतिक संसाधन, पर्यावरणीय स्थिरता, स्वच्छता या जलवायु परिवर्तन को उलटने में हो, जो सभी भारत के विकास और प्रगति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।


