पटना । राष्ट्रीय जनता दल के प्रमुख लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे और जनशक्ति जनता दल के सुप्रीमो तेजप्रताप यादव को फिलहाल जेल में ही रहना होगा। पटना की अदालत में पुलिस अधिकारियों पर हमला और हत्या के प्रयास के आरोपी पूर्व मंत्री तेजप्रताप यादव और छात्र नेता अभय आत्मन सिंह की नियमित जमानत अर्जी पर सुनवाई पूरी हो गई है, लेकिन अदालत ने अपना आदेश फिलहाल सुरक्षित रख लिया है।
अनुमंडलीय न्यायिक दंडाधिकारी आरती उपाध्याय की अदालत में सोमवार को बेऊर केंद्रीय कारागार में बंद तेजप्रताप यादव की जमानत पर गहन बहस हुई। गांधी मैदान थाना पुलिस ने तेजप्रताप यादव और प्रदर्शनकारी छात्रों पर पुलिसकर्मियों की हत्या के प्रयास सहित कई गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया है। पुलिस का दावा है कि इस हिंसक प्रदर्शन के दौरान गांधी मैदान थाना अध्यक्ष समेत आधा दर्जन पुलिसकर्मी घायल हो गए थे। सुनवाई के दौरान तेजप्रताप यादव के वकील ने दलील दी कि राजनीतिक विद्वेष और विरोध के चलते पुलिस ने उनके मुवक्किल पर झूठा केस दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार किया है। उन्होंने तेजप्रताप को पूरी तरह निर्दोष बताते हुए तुरंत नियमित जमानत पर रिहा करने की मांग की। बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने यह आरोप भी लगाया कि तेजप्रताप के खिलाफ रविवार रात करीब 12:50 बजे प्राथमिकी दर्ज की गई, जबकि उन्हें उससे कई घंटे पहले ही गैरकानूनी तरीके से हिरासत में ले लिया गया था। दूसरी तरफ, सरकारी वकील ने जमानत अर्जी का कड़ा विरोध किया। इसी मामले से जुड़े एक अन्य घटनाक्रम में पटना सिविल कोर्ट के मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी मनीष कुमार उपाध्याय ने विधायक संदीप सौरभ समेत दर्जनों नेताओं और छात्रों की जमानत अर्जी पर सुनवाई करते हुए पुलिस से उनके आपराधिक इतिहास और मेडिकल रिपोर्ट की मांग की है। इस मामले की अगली सुनवाई 1 अगस्त को होगी। गौरतलब है कि तत्कालीन शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग और परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के विरोध में वामपंथी छात्र संगठनों द्वारा 25 जुलाई को बिहार बंद का आह्वान किया गया था। इस प्रदर्शन के दौरान पटना, सारण, सिवान, औरंगाबाद और भागलपुर में हिंसा भड़क गई थी। पुलिस ने तेजप्रताप यादव को सरकारी काम में बाधा डालने और पुलिस पर हमले के आरोप में भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर गिरफ्तार किया था।
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