आदिवासी गौरव से अकादमिक विकास तक: एसकेएमयू ने मनाया 34वां स्थापना दिवस
कुलपति कुनुल कंदीर की अध्यक्षता में गरिमामय समारोह, पूर्व कुलपति मनोरंजन सिन्हा रहे मुख्य अतिथि
विश्वविद्यालय की प्रगति के लिए सामूहिक प्रयास अनिवार्य: प्रो. मनोरंजन प्रसाद सिन्हा
दुमका। सिदो-कान्हु मुर्मू विश्वविद्यालय, दुमका का 34वां स्थापना दिवस शनिवार को विश्वविद्यालय परिसर स्थित सभागार में धूमधाम, गरिमा और सांस्कृतिक उल्लास के साथ मनाया गया। समारोह की अध्यक्षता कुलपति प्रो. डॉ. कुनुल कंदीर ने की, जबकि विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. मनोरंजन प्रसाद सिन्हा मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम की शुरुआत स्मारक टीला पर वीर शहीद सिदो-कान्हु मुर्मू की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित करने से हुई। इसके पश्चात छात्र-छात्राओं ने पारंपरिक आदिवासी रीति-रिवाज के अनुसार मुख्य अतिथि का स्वागत किया। दीप प्रज्वलन एवं कुलगीत के सामूहिक गायन के साथ सभागार में औपचारिक कार्यक्रम आरंभ हुआ।
इस अवसर पर वर्ष 2024-25 में सेवानिवृत्त हुए शिक्षकों एवं शिक्षकेत्तर कर्मियों को उनके दीर्घकालीन योगदान के लिए सम्मानित किया गया। विभिन्न प्रतिनिधियों ने विश्वविद्यालय की शैक्षणिक उपलब्धियों, प्रशासनिक चुनौतियों तथा भविष्य की आवश्यकताओं पर अपने विचार रखे। वक्ताओं ने सीमित संसाधनों के बावजूद विश्वविद्यालय के निरंतर विकास, पठन-पाठन के विस्तार, शोध की गुणवत्ता सुधार, समयानुकूल पाठ्यक्रम, पदोन्नति एवं छात्र हित से जुड़े मुद्दों पर बल दिया।
ओएसडी (अकादमिक) द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट में विश्वविद्यालय से संबद्ध कॉलेजों, बीएड एवं प्रस्तावित लॉ कॉलेज की जानकारी दी गई। परीक्षा नियंत्रक ने समय पर परीक्षाओं एवं त्वरित परिणाम प्रकाशन की दिशा में किए जा रहे प्रयासों को रेखांकित किया। डीएसडब्ल्यू ने बताया कि यूजी नामांकन में 53.5 प्रतिशत छात्राएं शामिल हैं, जो महिला सशक्तिकरण का संकेत है।
एसपी महिला कॉलेज एवं एसपी कॉलेज की छात्राओं की सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने समारोह को रंगारंग बना दिया। मुख्य अतिथि प्रो. मनोरंजन प्रसाद सिन्हा ने विश्वविद्यालय को साझा उत्तरदायित्व बताते हुए सामूहिक प्रयास से गुणवत्ता शिक्षा पर जोर दिया। अध्यक्षीय संबोधन में कुलपति प्रो. डॉ. कुनुल कंदीर ने एनईपी-2020, शोध, खेल, प्लेसमेंट और अधोसंरचना विकास को प्राथमिकता देने की बात कही। कार्यक्रम का समापन धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।


