देवघर । श्रावणी मेला के दौरान बाबा बैद्यनाथ के दरबार में महादेव के भक्तों की आस्था के अलग-अलग रूप देखने को मिल रहे हैं। कोई आकर्षक कांवर लेकर बाबा नगरी पहुंच रहा है, तो कोई कठिन तपस्या और दंडवत यात्रा के जरिए अपनी श्रद्धा अर्पित कर रहा है। इसी क्रम में सामने आया एक ऐसा दृश्य, जिसने राहगीरों और श्रद्धालुओं को भावुक कर दिया। मुजफ्फरपुर निवासी एक कांवरिया अपनी महज दो से तीन माह की नन्ही बेटी को साथ लेकर सुल्तानगंज से देवघर तक दंडवत यात्रा कर रहे हैं। बेटी के जन्म के बाद पहली बार बाबा बैद्यनाथ के दरबार में हाजिरी लगाने निकले इस श्रद्धालु की आस्था देखते ही बन रही है। श्रद्धालु अपनी नन्ही बेटी को लकड़ी की एक छोटी गाड़ी में सुरक्षित बैठाकर, रस्सी के सहारे गाड़ी को खींचते हुए स्वयं सड़क पर दंडवत कर आगे बढ़ रहे हैं। बताया जा रहा है कि उन्होंने बाबा बैद्यनाथ से पुत्री प्राप्ति की मन्नत मांगी थी।
मन्नत पूरी होने के बाद बेटी के साथ बाबा के दरबार में पहुंचकर आभार जताने के लिए उन्होंने यह कठिन यात्रा शुरू की है। शहर में प्रवेश करने के बाद जब लोगों की नजर इस अनोखी आस्था पर पड़ी, तो कई लोग भावुक हो उठे। श्रद्धालु और स्थानीय लोग पुष्पवर्षा कर उनका स्वागत करते नजर आए। नन्ही बेटी के प्रति पिता का स्नेह, उसकी चाहत और महादेव के प्रति अटूट विश्वास का यह दृश्य हर किसी को अपनी ओर आकर्षित कर रहा है। बाबा नगरी में सामने आई यह तस्वीर केवल एक धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि एक पिता के संकल्प, बेटी के प्रति अटूट प्रेम और भगवान के प्रति गहरा विश्वास की जीवंत कहानी भी है। यही आस्था श्रावणी मेला को केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि भावनाओं और विश्वास का महापर्व बनाती है।


