आदित्य जोशी ने रोजगार और परीक्षा में पारदर्शिता की मांग उठाई*
कथित लाठीचार्ज और छात्राओं से दुर्व्यवहार की निष्पक्ष जांच की मांग*
एबीवीपी ने लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन जारी रखने की बात कही*
दुमका। राज्य सरकार के विरोध में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद दुमका की ओर से शनिवार को तीन बाजार चौक पर पुतला दहन कार्यक्रम आयोजित किया जाना था। हालांकि, कार्यक्रम शुरू होने से पहले ही प्रशासन ने एबीवीपी कार्यालय में मौजूद कार्यकर्ताओं को हाउस अरेस्ट कर दिया। इस दौरान कार्यालय के आसपास बड़ी संख्या में पुलिस बल और वाहनों की तैनाती की गई थी।
नगर सह मंत्री आदित्य जोशी ने आरोप लगाया कि सरकार युवाओं की आवाज को दबाने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि रोजगार और प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता की मांग कर रहे युवाओं पर बल प्रयोग करना लोकतांत्रिक अधिकारों का दमन है। उन्होंने कल युवाओं के विरोध प्रदर्शन के दौरान हुए लाठीचार्ज को अत्यंत निंदनीय बताते हुए इसकी निष्पक्ष जांच की मांग की।
आदित्य जोशी ने कहा कि सरकार युवाओं को रोजगार देने के मुद्दे से बचने का प्रयास कर रही है। जेपीएससी समेत विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं से प्रदेश के हजारों युवाओं का भविष्य प्रभावित हो रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार यदि स्वयं को आदिवासी हितों की सरकार बताती है, तो आदिवासी और झारखंड के युवाओं की आवाज उठाने पर उनके खिलाफ बल प्रयोग किया जाना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।
उन्होंने गिरिडीह, रांची और गढ़वा में हुई घटनाओं पर भी प्रशासन से निष्पक्ष कार्रवाई की मांग की। कहा कि एबीवीपी की ओर से शांतिपूर्ण तरीके से पुतला दहन किया जाना था, लेकिन इससे पहले ही कार्यकर्ताओं को हाउस अरेस्ट कर दिया गया। यह युवाओं के मनोबल को तोड़ने और सरकार की कथित कमियों को छिपाने का प्रयास प्रतीत होता है।
आदित्य जोशी ने कल के प्रदर्शन के दौरान छात्राओं के साथ कथित दुर्व्यवहार के मामले की भी निष्पक्ष जांच की मांग की। उन्होंने कहा कि एबीवीपी युवाओं के अधिकार, रोजगार, पारदर्शी परीक्षा व्यवस्था और बेहतर शिक्षा के मुद्दों को लेकर लोकतांत्रिक एवं शांतिपूर्ण तरीके से अपनी आवाज उठाती रहेगी।
हाउस अरेस्ट किए गए कार्यकर्ताओं में विभाग संगठन मंत्री हिमांशु दुबे, विभाग संयोजक अभिषेक गुप्ता, प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य अमन शाह, रिशु मुर्मू और नगर सह मंत्री आदित्य जोशी सहित अन्य कार्यकर्ता शामिल थे।


