खनिज मूल्य के साथ स्वामित्व राशि, डीएमएफ और अन्य शुल्क भी जुड़ेंगे,नियम 54 और 55 में संशोधन
डॉ.सुमन सिंह
दुमका। झारखंड सरकार के खान एवं भूतत्व विभाग ने लघु खनिजों के समुचित प्रबंधन और सरकारी विकास कार्यों में इनके उपयोग को लेकर नियमों में संशोधन किया है। विभाग ने 27 अक्टूबर 2026 को अधिसूचना जारी कर झारखंड लघु खनिज समनुदान (द्वितीय संशोधन) नियमावली, 2026 लागू करने की घोषणा की है। इसके तहत नियम 54 को प्रतिस्थापित करने के साथ नियम 54(क) के बाद नियम 55 जोड़ा गया है। साथ ही नियम 66 के बाद नियम 67 भी जोड़ा गया है। संशोधित नियम 54 के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति, एजेंट, मैनेजर, कर्मचारी या ठेकेदार निर्धारित अनुमति के बिना मिट्टी खनिज का उत्खनन, निकासी, खनन, भंडारण अथवा परिवहन करता है या ईंट-मिट्टी खनिज का भंडारण अथवा परिवहन बिना वैध चालान के करता है, तो संबंधित प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जाएगी।
अधिसूचना के अनुसार, यदि ईंट-मिट्टी खनिज निकालने वाले या ईंट भट्ठा संचालक निर्धारित स्वामित्व राशि का पूर्ण भुगतान कर अनुज्ञापत्र प्राप्त करने में असफल रहते हैं, तो ऐसे मामलों में खनिज के बाजार मूल्य के अतिरिक्त स्वामित्व राशि का दस गुना जुर्माना देना होगा। यह प्रावधान नियमावली की अनुसूची-3 के तहत ईंट के लिए निर्धारित मिट्टी पर स्वामित्व राशि से संबंधित है। नए नियम 55 के तहत सरकार द्वारा संचालित विकास कार्यों में लघु खनिजों की आपूर्ति और उनके उपयोग को लेकर जिम्मेदारी निर्धारित की गई है। इसके अनुसार, संबंधित कार्य विभाग, संवेदक, ठेकेदार और आपूर्तिकर्ता को यह सुनिश्चित करना होगा कि निर्माण कार्य में इस्तेमाल किए जाने वाले खनिज की खरीद वैध स्रोत से हुई हो।
खनिज की खरीद खनन पट्टा धारक या खनन अनुज्ञप्तिधारी से वैध चालान के माध्यम से अथवा निर्धारित प्रक्रिया के तहत की जानी चाहिए। निर्माण कार्य में इस्तेमाल किए गए खनिज के संबंध में आवश्यक अभिलेख और भुगतान का विवरण भी निर्धारित प्रावधानों के अनुरूप होना होगा। अधिसूचना में खनिजों के अवैध उपयोग अथवा निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं करने की स्थिति में जुर्माने की गणना का प्रावधान किया गया है। इसमें खनिज मूल्य के साथ स्वामित्व राशि, जिला खनिज फाउंडेशन (डीएमएफ), प्रबंधन शुल्क, पर्यावरणीय उपकर और आयकर को शामिल किया गया है।
नियम में दिए गए प्रावधान के अनुसार, खनिज मूल्य और स्वामित्व राशि के योग को दो से गुणा करने के बाद डीएमएफ, प्रबंधन शुल्क, पर्यावरणीय उपकर और आयकर जोड़ा जाएगा। इस प्रकार निर्धारित जुर्माना राशि की गणना की जाएगी। अधिसूचना में नियम 66 के बाद नियम 67 जोड़ा गया है। इसके तहत यदि नियमावली के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए किसी प्रक्रिया या मार्गदर्शक सिद्धांत का स्पष्ट प्रावधान नहीं है, तो संबंधित मामलों में प्रक्रिया निर्धारित करने और आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करने का अधिकार खान निदेशक को दिया गया है।


