- हताश मां को बेटे की सुराग के लिए अब किसी देवदूत का है इंतजार
- 5 महीने से बंद मां की खुशियाँ उसकी झोली में वापस लौट दे देवदूत
दुुमका:पिछले चार माह पूर्व लापता पुराना दुमका (शिव मंदिर चौक) निवासी कल्पना देवी व स्व0 केदारनाथ पाण्डेय के 16 वर्षीय पुत्र रोहन कुमार का अब तक नहीं मिल पाया है कोई सुराग। जिला प्रशासन से लेकर पुलिस प्रशासन तक लगातार बेटे की गुमशुदगी का गुहार लगा-लगाकर थक चुकी कल्पना देवी निराश, हताश हो चुकी है। विदित हो 07 मार्च 2024 को शिव मंन्दिर चौक स्थित अपने घर से रोहन गाँधी मैदान चौक की ओर निकला था जो आज तक वापस घर नहीं लौटा। अत्यंत ही गरीब और असहाय महिला कल्पना देवी के अनुसार घर से निकले पुत्र की देर रात तक लौटने का वह इंतज़ार करती रही। देर रात तक जब उसका पुत्र नहीं लौटा तो वह दूसरे दिन अपने सभी संबंधियों, रिश्तेदारों के यहाँ खोजबीन की। रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड से लेकर जहाँ-जहाँ उसके होने की संभावना होती ढूंढ़ ढूंढ़ कर थक गई किन्तु उनका पुत्र कहीं नहीं मिला।
पीड़ित महिला का यह आरोप है कि गाँधी मैदान से ही असामाजिक तत्वों द्वारा उसके पुत्र का अपहरण कर लिया गया अज्ञात सूत्रों द्वारा जिसकी जानकारी होने के बाद इसकी जानकारी उसने संबंधित थाने के पुलिसकर्मियों को दी थी। पुत्र की गुमशुदगी के बाद कल्पना देवी ने 11 मार्च 2024 को नगर थाना दुमका में लिखित आवेदन देकर रोहन कुमार की खोज-बीन की गुहार लगायी थी। नगर थाना के द्वारा कार्रवाई नहीं होने पर पुलिस अधीक्षक और उपायुक्त दुमका को आवेदन देकर लड़के की खोजबीन का अनुरोध किया था।
18 अप्रैल 2024 को भी नगर थाना दुमका में आवेदन दिया गया और इसकी जेरॉक्स कॉपी सी डब्लू सी (जिला बाल कल्याण समिति) को दिया। पीड़ित महिला कल्पना देवी ने कहा कि 23 अप्रैल 2024 को पुनः नगर थाना दुमका को आवेदन देकर अपनी समस्या से अवगत कराया, किन्तु आज तक उसके बेटे रोहन कुमार की खोजबीन की दिशा में किसी प्रकार की कार्रवाई का कोई परिणाम सामने नहीं आया।
पीड़ित महिला का दावा है कि उसके पुत्र रोहन कुमार का अज्ञात अपराधियों के द्वारा अपहरण कर लिया गया है। असहाय, गरीब और पीड़ित उक्त महिला ने अपनी अवस्था की दुहाई देते हुए डीसी दुमका से निजी स्तर पर मामले को संगीन मानते हुए कार्रवाई की अंतिम आस लगायी। कहा कि उसके पुत्र रोहन कुमार जो उसके बुढ़ापे की लाठी है, को सही सलामत खोज लाने का प्रयास किया जाय ताकि पिछले 5 महीने से बंद उसकी खुशियाँ उसकी झोली में वापस लौट सके।


