नई दिल्ली । देश में पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिलाने की नीति यानी ई 20 को ऊर्जा आत्म निर्भरता और विदेशी मुद्रा बचाने की योजना बताया गया था। अब इसके आर्थिक फायदे और उपभोक्ता पर पड़ने वाले असर को लेकर सवाल उठने लगे हैं। सरकार के अनुसार एथेनॉल ब्लेंडिंग से अब तक विदेशी मुद्रा की बड़ी बचत और कच्चे तेल के आयात में कमी हुई है।
इस नीति का सबसे बड़ा फायदा चीनी मिलों और डिस्टिलरी कंपनियों को मिला है । बालरामपुर चीनी मिल्स, त्रिवेणी इंजीनियरिंग, धामपुर शुगर मिल, डालमिया भारत शुगर, श्री रेणुका शुगर्स, ईआईडी पैरी और बजाज हिंदुस्तान शुगर जैसी कंपनियां एथेनॉल उत्पादन से जुड़ी हैं। इन्होंने भारी मुनाफा कमाया है। किसानों के गन्ने की कीमतों में कोई ऐसी वृद्धि नहीं हुई है,जो किसानों के फायदे से जोड़कर देखी जा सके।
मुद्दा सिर्फ कंपनियों के मुनाफे का नहीं, बल्कि उपभोक्ताओं के खर्च का भी है। ग्राहकों को 60 से ₹70 प्रति किलो शक्कर खरीदनी पड़ रही है। गन्ने और मक्के का बड़ा हिस्सा एथेनॉल बनाने में किया गया है। चीनी की घरेलू उपलब्धता और कीमतों पर दबाव बना है। देश में शक्कर का भंडार पिछले 9 साल में सबसे कम है। जिसके कारण शक्कर की कीमत लगातार बढ़ती चली जा रही हैं। अगस्त में घरेलू चीनी की कीमतें करीब 20 प्रतिशत बढ़कर 4,800 से 6200 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गई है ।
दूसरी तरफ ई 20 पेट्रोल से वाहनों की माइलेज घटने और वाहन खराब होने से वाहन मालिकों में गंभीर है नाराजी है । सरकारी आकलन में वाहन के अनुसार 2-6 प्रतिशत तक माइलेज कमी की बात स्वीकार की है। पुराने वाहनों को लेकर भी चिंता जाहिर की है।
सबसे बड़ा सवाल यह है, एथेनॉल नीति का वास्तविक आर्थिक लाभ किसे मिला। कच्चे तेल के आयात में बचत आई ? कंपनियों को या उपभोक्ताओं को इसका लाभ मिला ? इथेनॉल के इस खेल में इथेनॉल बनाने वाली, तथा पेट्रोलियम कंपनियों की कमाई जरूर कई गुना बढ़ गई है। करोणों उपभोक्ताओं से इसकी वसूली की गई है। चीनी की कीमत, किसानों की आय, वाहन खर्च और वास्तविक विदेशी मुद्रा बचत का स्वतंत्र ऑडिट सरकार को सार्वजनिक करना चाहिए। ई 20 पेट्रोल को लेकर सरकार ने जो खेल खेला है। उसमें आमदनी अठन्नी और खर्चा रुपैया जैसी स्थिति देखने को मिल रही है। सरकार का कच्चे तेल का आयात बढा है। विदेशी मुद्रा के रूप में डॉलर की आवश्यकता बढी है। डॉलर का रेट रुपए के मुकाबले 98 रुपए तक पहुंच गया है। सरकार के दावे के विपरीत हर जगह हर किसी को नुकसान ही नुकसान है।


