संताल एक्सप्रेस संवाददाता
साहिबगंज- वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग साहिबगंज एवं भारतीय वन्यजीव संस्थान देहरादून के संयुक्त तत्वावधान में बुधवार को भारत में नदी और मुहाना डॉल्फ़िन की आबादी का व्यापक आंकलन – द्वितीय चक्र विषय पर एक दिवसीय क्षेत्रीय प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन डॉल्फिन व्याख्या केंद्र चानन साहिबगंज में किया गया.कार्यशाला का शुभारंभ मुख्य अतिथि साहिबगंज वन प्रमंडल पदाधिकारी प्रबल गर्ग ने किया. इस अवसर पर डीपीओ, नमामि गंगे अमित मिश्रा की गरिमामय उपस्थिति रही. भारतीय वन्यजीव संस्थान से प्रोजेक्ट डॉल्फिन की वैज्ञानिक डॉ. सनी देउरी ने रेंजवाइड नदीय एवं मुहाना क्षेत्र डॉल्फिन आंकलन विषय पर विस्तृत परिचयात्मक प्रस्तुति दी.अपने उद्घाटन संबोधन में वन प्रमंडल पदाधिकारी प्रबल गर्ग ने डॉल्फिन संरक्षण की आवश्यकता तथा वैज्ञानिक एवं मानकीकृत आंकलन पद्धति के महत्व पर बल दिया. उन्होंने उपस्थित वन कर्मियों एवं साहिबगंज क्षेत्र के डॉल्फिन वाचरों से प्रशिक्षण के दौरान बताई गई विधियों को गंभीरता से सीखने एवं भविष्य में सर्वेक्षण कार्य में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया.
साथ ही उन्होंने वन विभाग एवं भारतीय वन्यजीव संस्थान के विशेषज्ञों का पारस्परिक परिचय कराते हुए उनकी विशेषज्ञता से प्रतिभागियों को अवगत कराया.तकनीकी सत्रों के अंतर्गत देहरादून के शोधार्थियों द्वारा डॉल्फिन गणना से संबंधित विभिन्न विषयों पर विस्तृत प्रशिक्षण प्रदान किया गया.गौतम ने डॉल्फिन आकंलन पद्धति की वैज्ञानिक प्रक्रिया को विस्तार से समझाया. सुरोजित मोइत्रा ने डॉल्फिन पर्यावास एवं मानवीय गतिविधियों की रिकॉर्डिंग पद्धति पर प्रशिक्षण दिया. विजय प्रताप सिंह ने नदीय जीव-जंतुओं की निगरानी एवं आंकड़ों के वैज्ञानिक संकलन की विधि पर सत्र संचालित किया.इसके अतिरिक्त भारतीय वन्यजीव संस्थान की डॉल्फिन सर्वेक्षण टीम द्वारा वन विभाग के फील्ड कर्मचारियों को सर्वेक्षण में प्रयुक्त उपकरणों के संचालन एवं उपयोग की व्यवहारिक जानकारी प्रदान की गई.
तत्पश्चात साहिबगंज स्थित डॉल्फिन व्याख्या केंद्र घाट पर गंगा नदी में फील्ड डेमोंस्ट्रेशन के माध्यम से व्यावहारिक प्रशिक्षण कराया गया. जिससे प्रतिभागियों को स्थल पर ही आंकलन प्रक्रिया का प्रत्यक्ष अनुभव प्राप्त हुआ.इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य नदीय एवं मुहाना डॉल्फिन की सटीक एवं वैज्ञानिक गणना सुनिश्चित करने हेतु अधिकारियों एवं फील्ड स्टाफ को मानकीकृत पद्धतियों से प्रशिक्षित करना था. ताकि भविष्य में डॉल्फिन संरक्षण कार्यक्रमों को अधिक प्रभावी एवं परिणामोन्मुख बनाया जा सके.कार्यक्रम में भारतीय वन्यजीव संस्थान देहरादून की प्रोजेक्ट डॉल्फिन वैज्ञानिक डॉ. सोभना रॉय की भी गरिमामय उपस्थिति रही. उन्होंने डॉ. सनी देउरी के साथ मिलकर कार्यशाला के सफल संचालन में महत्वपूर्ण मार्गदर्शन प्रदान किया.कार्यशाला में वनरक्षी इन्द्रजीत एवं अंकित झा ने भी सक्रिय सहभागिता निभाई.फील्ड अभ्यास के दौरान उन्होंने सर्वेक्षण प्रक्रियाओं को समझने, उपकरण संचालन में सहयोग देने तथा प्रशिक्षण को व्यवहारिक स्तर पर लागू करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.


