नई दिल्ली । कोलकाता के नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर बैंकॉक से आए एक यात्री के सामान से कछुओं की एक ऐसी प्रजाति बरामद हुई, जिसे दुनिया की सौ सबसे आक्रामक प्रजातियों में शामिल किया गया है। भारतीय कस्टम विभाग की एयर इंटेलिजेंस यूनिट के अधिकारियों ने सात सौ से अधिक रेड-इयर स्लाइडर कछुए बरामद किए। अपनी आँखों के ठीक पीछे लाल रंग की पट्टी, एक बच्चे के रूप में शांत स्वभाव और सस्ती कीमत की वजह से रेड-इयर स्लाइडर लंबे समय से दुनिया के पेट ट्रेड यानी पालतू व्यापार का एक प्रमुख हिस्सा रहा है। हालांकि, दुनिया भर की पर्यावरण एजेंसियों और वन अधिकारियों ने इस छोटे और रेंगने वाले रंगीन सरीसृप को लेकर नए सिरे से चेतावनी जारी की है। उनका कहना है कि अनियंत्रित व्यापार और अवैध रूप से इन्हें नदियों-तालाबों में छोड़ने की वजह से यह प्यारा सा पालतू जीव दुनिया की वैश्विक पारिस्थितिकी के लिए एक बड़ा खतरा बन गया है। प्रकृति संरक्षण के लिए अंतर्राष्ट्रीय संघ की तरफ से दुनिया की सौ सबसे खराब और आक्रामक प्रजातियों में से एक के रूप में सूचीबद्ध, रेड-इयर स्लाइडर मूल रूप से दक्षिणी संयुक्त राज्य अमेरिका और उत्तरी मेक्सिको का निवासी है। अभी हालात यह हैं कि इसने अंटार्कटिका को छोड़कर हर महाद्वीप पर जंगली आबादी स्थापित कर ली है। समस्या की जड़ जल्दबाजी में खरीदारी और बाद में उन्हें लावारिस छोड़ देने के चक्र में छिपी है। जब इन्हें पेट स्टोर्स या अवैध बाजार से खरीदा जाता है तो ये छोटे स्लाइडर कछुए अक्सर चार इंच से भी छोटे होते हैं।
हालांकि, खरीदार यह समझने में नाकाम रहते हैं कि ये सरीसृप बहुत तेजी से बढ़ते हैं। ये बारह से सोलह इंच तक यानी तीस से चालीस सेमी की लंबाई तक पहुँचते हैं और कैद में बीस से चालीस सालों तक जीवित रह सकते हैं। जब देखभाल नहीं कर पाने वाले मालिक इन बड़े हो चुके कछुओं को नजदीकी तालाबों, नदियों या शहर की झीलों में छोड़ देते हैं तो स्थानीय जैव विविधता पर इसके गंभीर नतीजे होते हैं। स्लाइडर कई सारे स्थानीय मीठे पानी के कछुओं की तुलना में बड़े होते हैं, तेजी से वयस्क होते हैं और बहुत अधिक आक्रामक व्यवहार को दर्शाते हैं। वे धूप सेंकने के लिए लकड़ी के लट्ठों और पत्थरों पर कब्जा कर लेते हैं, जो कछुओं के शरीर के तापमान को नियंत्रित करने के लिए बेहद जरूरी है। इसके साथ ही, वे भोजन और घोंसला बनाने की जगहों के लिए स्थानीय प्रजातियों को बेदखल कर देते हैं। अवसरवादी और सर्वाहारी होने की वजह से स्लाइडर बड़ी संख्या में स्थानीय मछलियों, जलीय कीड़ों, पौधों और मेढक वगैरह के अंडों का शिकार करते हैं। पारिस्थितिक नुकसान के अलावा, स्लाइडर साल्मोनेला (बैक्टीरिया) का वाहक माना जाता है, जो इंसानों और खास तौर से छोटे बच्चों के लिए सीधा स्वास्थ्य जोखिम पैदा करता है जो इन्हें छूते हैं।
जानकारी के मुताबिक, फ्लाइट से उतरा यात्री ग्रीन चैनल से गुजर रहा था, तभी एयर इंटेलिजेंस यूनिट अधिकारियों को उसके सामान के अंदर कुछ हलचल महसूस हुई। अधिकारियों ने तुरंत यात्री को हिरासत में लिया और उसके सामान की जाँच शुरू की। तलाशी के दौरान उसके एक बैग से कुल सात सौ सात कछुए बरामद हुए। बाद में पुष्टि हुई कि ये सभी कछुए रेड-इयर स्लाइडर प्रजाति के हैं। यात्री को वन्यजीव तस्करी के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया है। भारतीय पालतू पशु बाजार में रेड-इयर स्लाइडर कछुओं की काफी मांग है। इसके दो मुख्य कारण बताए जाते हैं। पहला, भारत में पाए जाने वाले कछुए वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत पूरी तरह संरक्षित हैं, इसलिए कुछ लोग रेड-इयर स्लाइडर कछुओं को अवैध और अनौपचारिक तरीकों से मंगाने की कोशिश करते हैं। दूसरा कारण यह है कि भारत में इस प्रजाति की काफी मांग है।


