जितेन्द्र दास
पाकुड़ । गरीब परिवार का भी एक छोटा सा हो पक्का घर अपना इसके लिए झारखंड सरकार ने इस उम्मीद के साथ अबुआ आवास योजना लेकर आयी है। लेकिन जरूरतमंद लोगों को इस योजना का लाभ नही मिल पा रहा है। सच तो यह है कि आज भी गरीब व उचित व्यक्ति योजना का लाभ लेने के लिए सरकारी दफ्तरों का चक्कर काट काट कर थक गए हैं। बता दे कि वर्षो से केंद्र सरकार ने भी विभिन्न नाम से यथा – पहले इंदिरा गांधी आवास और बाद में प्रधानमंत्री आवास योजना चलाई । अब केंद्र सरकार ने झारखंड में आवास योजना बंद कर दी। इसके बाद झारखंड सरकार ने प्रदेश में अपनी आवास योजना चालू की। जिसका नाम “अबुवा आवास ” रखा गया। इस योजना का जोर -सोर से प्रचार प्रसार भी किया गया। पर अभी भी कई ऐसे योग्य परिवार है जो इस योजना से बंचित है। ऐसा ही एक मामला लिट्टीपाड़ा प्रखंड के बैजनाथपुर गांव की है। जहां एक आदिवासी परिवार के तालामय हेम्ब्रम, की हालत दयनीय है। अपने तीन बच्चों व पति के साथ बास व पत्तियों के झोपड़ी में रहते हैं । तलामय हेम्ब्रम व पति ग्रीस मुर्मू ने बताया कि प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ नही मिलने पर अबुवा आवास के इंतजार में है। साथ ही बताया कि अबुवा आवास योजना की सूची में नाम रहने के बाबजूद इस लाभ से वंचित कर दिया गया । मिट्टी और पत्ते से बने घर की हालत ऐसी है की ,जब बादलों की तेज गजर के साथ बारिश होती है ,तब इस घर मे रात्रि में सोने से पहले डर सताती है। साथ ही बताया कि मेहनत मजदूरी कर किसी तरह परिवार का गुजारा करते है। आर्थिक स्थिति खराब है तो मक्का मकान कहा से बनाये। उधर जिले के आमड़ापाडा प्रखंड के रसिकटोला के दिव्यांग महिला दुल्हन मुर्मू जो अबतक इस अबुवा आवास योजना से बंचित है। उन्होंने बताया की अबुवा आवास लेने के आस में है । पर लगता है कि मेरे किस्मत में मक्का मकान नही है। इस लिए कच्चा घर मे रहने को मजबूर हु। सूत्रों की माने तो इन दिनों जनप्रतिनिधियों व पंचायत कर्मियों के द्वारा रकम लेकर गरीब असहाय लोगों अबुवा आवास योजना का लाभ दे रहे हैं। ऐसा ही एक मामला लिट्टीपाड़ा प्रखंड के जबरदाहा पंचायत में बिते दिन सामने आया है।जहां पंचायत सचिव अमित महतो द्वारा अबुवा आवास योजना का लाभ देने के नाम पर लाभुकों से पैसे के मांग कर रहे थे। इसका विरोध करने पर वार्ड सदस्य मुन्नी रजक को जाती सूचक गली देने को लेकर एससी-एसटी मामले में पुलिस ने पँचायत सचिव को बीते दिनों,गिरफ्तार कर जेल भेजा है। बात है आप लाख प्रयास कर ले बिना चढ़ावा और दक्षिणा के एक भी कम होने वाला नहीं। और यदि कुछ बोलिएगा तो साथ गांठ है ऐसी की आपको ही जेल जाना पड़ेगा। आखिर कंप्लेंन कहां कीजिएगा कीजिएगा । कहीं कोई जनसुनवाई नहीं। कहते हैं ना कि अखबार में छापने की बात कुछ और हकीकत में कुछ ओर……….।


