रामा कान्त मालवीय
आदिवासी जनसंख्या घटने का कारण पलायन : संभवी
ए एस कॉलेज देवघर की छात्रा संभवी हांसदा का मानना है कि झारखंड में रहने वाले आदिवासी समाज की घट रही जनसं या का सबसे बड़ा कारण पलायन है।गरीबी की वजह से आदिवासी झारखंड से दूसरे राज्य में रहने और काम करने जा रहे है। ताकि उनका गुजर बसर सही तरीके से हो सके। अंतधार्मिक विवाह भी एक कारण है। जिसमें आदिवासी दूसरे धर्म के लोगों से शादी कर लेते हैं और उनका धर्म बदल जाता है। इस वजह से उन्हें आदिवासियों के आंकड़े में नहीं गिना जाता है।
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आदिवासी समाज के अधिकांश लोग नशे के आदी: लोबीन मुर्मू
एएस कॉलेज देवघर के छात्र लोबीन मुर्मंंू कहते हैं कि झारखण्ड में आदिवासियों की जनसं या घटने की मुख्य कारण नशाखोरी, अंधविश्वास व चिकित्सा का अभाव तथा अन्य प्रदेशों में रोजी रोजगार के लिए पलायन करना है। आदिवासी समाज के लोग छोटे- बड़े सभी नशे के आदी होते हैं,जिससे हमारे शरीर में बुरा असर पड़ता है, जिसके फलस्वरूप जन्म दर कम तथा मृत्यु दर अधिक होती है। जिस प्रकार से आदिवासी समाज में,समाज के लोग चाहे वो कितनी भी गंभीर बीमारी से ग्रसित क्यों न हो लेकिन वो चिकित्सा पर विश्वास न करके झाड़ फूंक पर ही अधिक विश्वास करते हैं।तथा आदिवासियों की एक ओर समस्या ये भी है कि आज भी लव जिहाद,धर्मांतरण जैसी समस्याओं से आदिवासी समाज जूझ रहा है।
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विदेशी घुसपैठ व अंतधार्मिक विवाह कारण: सुशील हेम्ब्रोम
एएस कॉलेज छात्र सुशील हे ब्रम का मानाना है कि आदिवासी समाज जो संथाल परगना का एक अत्यंत पिछड़ा एवं अविकसित समाज है । इस समाज मेें विदेशी घुसपैठिए द्वारा इस समाज के लोगों को बहला फुसलाकर उनसे शादी कर लेता है जो इस को घुसपैठ को आदिवासी का तो अवैध लाभ तो मिलता है लेकिन आदिवासी कहीं का नहीं रहता है। आदिवासी जनसं या पर प्रभाव पड़ता है
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बंगलादेशी घुसपैठिय को रोकना होगा : राजेश मुर्मू
बांग्लादेशी मुसलमान भाई अपने को भारत का नागरिकता पाने के उद्देश्य से यहां के आदिवासी बहनों को जारिया बनाकर उनसे शादी कर रहे हैं। इससे आदिवासी समाज को जो सरकारी सुरक्षा मिल रहा है इससे तो वंचित होने के साथ साथ आदिवासी समाज के लोगों की जनसं या प्रभावित हो रही है। इस विषय पर सरकार गंभीरता से नहीं लिया तो आदिवासी समाज का अस्तित्व खतरे में पड़ सकता है ।


