नई दिल्ली । कनाडा में उच्च शिक्षा का सपना देखने वाले भारतीय छात्रों के लिए चिंता बढ़ाने वाली खबर सामने आई है। कनाडा में अब सिर्फ ट्यूशन फीस ही नहीं, बल्कि रहने, खाने, परिवहन और अन्य आवश्यक चीजों का खर्च भी काफी बढ़ गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, 1,77,000 सीएडी का यह अनुमान उस पूरी अवधि को दर्शाता है जब कोई छात्र कनाडा पहुंचता है और अपनी डिग्री पूरी करता है। बढ़ते किराये, बिजली-पानी, इंटरनेट और परिवहन शुल्कों ने कुल खर्च को रिकॉर्ड स्तर तक पहुंचा दिया है। रिपोर्ट के अनुसार, वहां चार साल की डिग्री की औसत लागत अब 1,77,000 कनाडाई डॉलर (सीएडी) से अधिक हो चुकी है, जो भारतीय मुद्रा में लगभग 1.08 करोड़ रुपये बैठती है। अगर इसमें रहने, खाने और वीजा जैसी अतिरिक्त लागतें जोड़ दी जाएं, तो कुल खर्च लगभग 1.5 करोड़ रुपये तक पहुंच जाता है।
यह बढ़ता खर्च भारतीय मिडिल क्लास परिवारों के लिए बड़ी चुनौती बन गया है, जो अपने बच्चों को बेहतर भविष्य के लिए विदेश भेजना चाहते हैं। रिपोर्ट में बताया गया है कि पिछले कुछ वर्षों में कनाडा के विश्वविद्यालयों ने सरकारी फंडिंग में कमी की भरपाई इंटरनेशनल स्टूडेंट्स से की है। इसी कारण विदेशी छात्रों की फीस में लगातार इजाफा हुआ है। टोरंटो और वैंकूवर जैसे बड़े शहरों में रहने की लागत तो और भी ज्यादा है। यहां न केवल हॉस्टल या पीजी किराया बढ़ा है, बल्कि सामान्य जीवन-यापन का खर्च भी कई गुना बढ़ चुका है। इस वजह से अब छात्र ऐसे विकल्पों की तलाश कर रहे हैं जहां या तो खर्च कम हो या उन्हें स्कॉलरशिप और फाइनेंशियल एड की सुविधा मिल सके। रिपोर्ट के अनुसार, कनाडा में पढ़ाई महंगी होने की मुख्य वजह बढ़ती ट्यूशन फीस और आवास संकट है। विश्वविद्यालय अब घरेलू छात्रों की तुलना में अंतरराष्ट्रीय छात्रों से अधिक शुल्क वसूल रहे हैं, जिससे वे राजस्व का बड़ा हिस्सा प्राप्त करते हैं। साथ ही, देश में इंफ्लेशन के कारण खाने-पीने और ट्रांसपोर्ट की लागत में भी तेज वृद्धि हुई है।विशेषज्ञों का कहना है कि जो भारतीय छात्र कनाडा में पढ़ाई का मन बना रहे हैं, उन्हें अब पहले से ज्यादा सावधानीपूर्वक वित्तीय योजना बनानी चाहिए। सस्ते शहरों जैसे क्यूबेक या मैनिटोबा पर विचार करना, स्कॉलरशिप के लिए पहले से तैयारी करना और पढ़ाई के साथ पार्ट-टाइम काम के अवसरों को समझना उनके लिए लाभदायक हो सकता है।
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