अधिकारियों को सफाई व्यवस्था और फ्यूमिगेशन प्रक्रिया में मिलीं तकनीकी खामियां
नई दिल्ली । भारतीय आमों की मिठास इस बार जापान तक नहीं पहुंच पाएगी। करीब दो दशक पहले हटाए गए प्रतिबंध के बाद लगातार जारी भारतीय आमों के निर्यात पर जापान ने एक बार फिर अस्थायी रोक लगा दी है। इस फैसले से आम निर्यातकों और किसानों की चिंता बढ़ गई है, क्योंकि यह प्रतिबंध ऐसे समय लगाया गया है जब अप्रैल से जून के बीच आमों का निर्यात अपने चरम पर होता है। इस रोक का सबसे ज्यादा असर अल्फांसो, केसर, लंगड़ा और बंगनपल्ली जैसी आम किस्मों पर पड़ेगा, जिनकी जापान में अच्छी मांग है।
जानकारी के मुताबिक जापान हर साल आम के निर्यात सीजन से पहले अपनी क्वारंटीन टीम भारत भेजता है। यह टीम उन वेपर हीट ट्रीटमेंट केंद्रों का निरीक्षण करती है, जहां जापान भेजे जाने वाले आमों को प्रोसेस किया जाता है। इस प्रक्रिया में आमों को गर्म और नमी वाली हवा में रखा जाता है ताकि फल मक्खियों और अन्य कीटों को खत्म किया जा सके। जापान के लिए आम निर्यात करने में यह प्रक्रिया अनिवार्य है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस साल मार्च में उत्तर प्रदेश के रहमानपुर स्थित वेपर हीट ट्रीटमेंट केंद्र का निरीक्षण किया गया था। निरीक्षण के दौरान जापानी अधिकारियों को वहां सफाई व्यवस्था और फ्यूमिगेशन प्रक्रिया से जुड़ी कुछ तकनीकी खामियां मिलीं। हालांकि दोनों देशों की सरकारों ने अब तक यह स्पष्ट नहीं किया है कि वास्तव में कौन-कौन सी कमियां मिली। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि मौजूदा निर्यात सीजन के दौरान यह समस्या सुलझ पाएगी या नहीं। जापान के प्लांट प्रोटेक्शन स्टेशन और भारत की कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण ने अभी तक किसी समयसीमा की घोषणा नहीं की है। इस कारण निर्यातकों के सामने अनिश्चितता की स्थिति बनी हुई है।
बता दें जापान ने पहली बार 1986 में भारतीय आमों पर प्रतिबंध लगाया था, क्योंकि उसे फल मक्खियों के संक्रमण का खतरा था। करीब 20 साल बाद 23 जून 2006 को यह प्रतिबंध हटाया गया था और उसके बाद भारत से जापान को आमों का निर्यात दोबारा शुरू हुआ। जापान ने केवल छह भारतीय किस्मों अल्फांसो, केसर, बंगनपल्ली, लंगड़ा, चौसा और मलिका को आयात की अनुमति दी थी। इन आमों को निर्यात से पहले वेपर हीट ट्रीटमेंट प्रक्रिया से गुजरना अनिवार्य किया गया था। हालांकि जापान भारतीय आमों का सबसे बड़ा बाजार नहीं है, लेकिन यह प्रीमियम बाजार माना जाता है। जापान में भारतीय आमों को ऊंची कीमत मिलती है, इसलिए यह प्रतिबंध निर्यातकों की कमाई पर सीधा असर डाल सकता है।


