बेंगलुरु । कर्नाटक की राजनीति में एक बड़ा उलटफेर करते हुए राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने मुख्यमंत्री सिद्धारमैया का इस्तीफा स्वीकार कर लिया है और संविधान के अनुच्छेद 164(1) के तहत मौजूदा मंत्रिपरिषद को तत्काल प्रभाव से भंग कर दिया है। कांग्रेस आलाकमान के निर्देश पर पद छोड़ने वाले सिद्धारमैया नई व्यवस्था होने तक कार्यवाहक मुख्यमंत्री बने रहेंगे। इस बड़े बदलाव के बाद राज्य में नई सरकार के गठन की हलचल तेज हो गई है और कर्नाटक कांग्रेस अध्यक्ष डीके शिवकुमार का अगला मुख्यमंत्री बनना लगभग तय माना जा रहा है।
सरकार की रूपरेखा और नए कैबिनेट विस्तार की रणनीति तय करने के लिए डीके शिवकुमार, सिद्धारमैया और प्रभारी रणदीप सुरजेवाला दिल्ली पहुंच चुके हैं, जहाँ वे पार्टी के शीर्ष नेतृत्व मल्लिकार्जुन खरगे और राहुल गांधी के साथ अहम बैठक करेंगे। इस बैठक में नया कैबिनेट विस्तार, आगामी राज्यसभा चुनाव और एमएलसी उम्मीदवारों के नाम पर अंतिम मुहर लगेगी।
सूत्रों के मुताबिक, शिवकुमार के नेतृत्व में बनने वाली नई सरकार में क्षेत्रीय और सामाजिक संतुलन साधने के लिए चार उपमुख्यमंत्री बनाए जा सकते हैं, जबकि सिद्धारमैया गुट के कई पुराने चेहरों की छुट्टी होने की संभावना है।
वहीं, सिद्धारमैया की राजनीतिक विरासत को जोड़े रखने के लिए उनके बेटे और विधान परिषद सदस्य यतींद्र को नई कैबिनेट में कोई बड़ा मंत्रालय सौंपा जा सकता है। इस बीच, नेताओं के दिल्ली दौरे के दौरान खराब मौसम का खलल भी देखने को मिला, जहाँ डीके शिवकुमार देर रात भारी टर्बुलेंस के बीच दिल्ली पहुंचे, वहीं सिद्धारमैया के विमान को जयपुर डायवर्ट करना पड़ा, जहाँ उन्होंने राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से मुलाकात की। अब सबकी नजरें आज तय होने वाली कांग्रेस विधायक दल की बैठक पर टिकी हैं, जिसके बाद डीके शिवकुमार के शपथ ग्रहण समारोह की तारीख का औपचारिक ऐलान कर दिया जाएगा।


