वायुसेना दिवस पर हिंडन स्टेशन में भव्य परेड, वायुसेना प्रमुख ने कहा- संगठन का हित हमेशा व्यक्तिगत हितों से ऊपर रखें
नई दिल्ली । भारतीय वायुसेना ने गुरुवार को अपना 94वां वायुसेना दिवस मनाया। इस अवसर पर गाजियाबाद स्थित हिंडन वायुसेना स्टेशन में भव्य परेड आयोजित की गई। समारोह में वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह, थलसेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ, नौसेना प्रमुख एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन, पूर्व वायुसेना प्रमुखों, वायु योद्धाओं और विशिष्ट अतिथियों ने हिस्सा लिया।
वायुसेना दिवस के अवसर पर अपने संबोधन में वायुसेना प्रमुख एपी सिंह ने कहा कि हर वायु योद्धा को यह संकल्प लेना चाहिए कि कितनी भी कठिन परिस्थिति क्यों न आए, वह ऐसी कमजोर कड़ी नहीं बनेगा, जिससे वायुसेना रूपी श्रृंखला कमजोर या टूट जाए। उन्होंने कहा कि वायुसेना का प्रत्येक सदस्य संगठन की महत्वपूर्ण कड़ी है और उसे अपने कर्तव्यों व जिम्मेदारियों पर गर्व होना चाहिए। उन्होंने वायुसेना में आपसी सम्मान और समानता का वातावरण बनाए रखने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि संगठन में किसी भी तरह का पक्षपात या भेदभाव नहीं होना चाहिए। वायु योद्धाओं को संगठन के हित को व्यक्तिगत हितों से ऊपर रखने का आह्वान करते हुए उन्होंने ‘स्वयं से पहले सेवा’ के सिद्धांत को वायुसेना के मूल भाव के रूप में रेखांकित किया।
सही दिशा में आगे बढ़ना जरूरी
वायुसेना प्रमुख सिंह ने लगातार आत्मचिंतन की जरूरत बताते हुए कहा कि केवल आगे बढ़ना पर्याप्त नहीं है, बल्कि सही दिशा में आगे बढ़ना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि देश की सेवा और वायुसेना के हित को हर परिस्थिति में निजी हितों से ऊपर रखा जाना चाहिए। उन्होंने देश की रक्षा में प्राण न्योछावर करने वाले वायु योद्धाओं को श्रद्धांजलि दी और कहा कि उनके बलिदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता। पूर्व वायु योद्धाओं के योगदान को याद करते हुए उन्होंने कहा कि उनके समर्पण, दूरदर्शिता, मेहनत और सोच ने भारतीय वायुसेना की पहचान और क्षमताओं को मजबूत आधार दिया है।
नागरिकों का सहयोग वायुसेना की सबसे बड़ी ताकत
वायुसेना प्रमुख एपी सिंह ने कहा कि देश की सुरक्षा वायुसेना का धर्म है, जबकि नागरिकों का प्रेम और सहयोग उसकी सबसे बड़ी ताकत है। उन्होंने देशवासियों को निरंतर समर्थन के लिए धन्यवाद दिया और भरोसा दिलाया कि वायुसेना उनके विश्वास पर खरा उतरने में कोई कसर नहीं छोड़ेगी। उन्होंने वायु योद्धाओं के परिवारों और जीवनसाथियों के त्याग व सहयोग की भी सराहना की।
वायु युद्धाओं से समर्पण का आव्हान
परेड के शानदार प्रदर्शन की प्रशंसा करते हुए उन्होंने परेड कमांडर सहित सभी प्रतिभागियों को बधाई दी। उन्होंने परेड की चाल, वेशभूषा, अनुशासन और उत्साह की विशेष सराहना की। संबोधन के अंत में उन्होंने सभी वायु योद्धाओं से राष्ट्रसेवा के लिए स्वयं को फिर समर्पित करने का आह्वान किया और भारतीय वायुसेना को नई ऊंचाइयों तक ले जाने का संकल्प दोहराया। उन्होंने वायुसेना के आदर्श वाक्य ‘नभः स्पृशं दीप्तम्’ को कायम रखने का संदेश देते हुए ‘जय हिंद’ के उद्घोष के साथ अपना संबोधन समाप्त किया।


