संताल एक्सप्रेस संवाददाता
पाकुड़। जिले में पत्थर खनन से जुड़े कथित दस्तावेजी फर्जीवाड़े का मामला सामने आने के बाद खनन विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। पर्यावरणीय स्वीकृति प्राप्त करने के लिए दस्तावेजों में हेरफेर किए जाने के आरोप में 13 लोगों के खिलाफ नगर थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई गई है। इनमें नौ पूर्व खनन पट्टाधारी तथा चार नए आवेदक शामिल हैं। यह मामला वित्तीय वर्ष 2022-23 के दौरान महालेखाकार कार्यालय द्वारा की गई ऑडिट जांच में मामले का खुलासा हुआ। जांच के दौरान जिला खनन कार्यालय द्वारा जारी कंटिगुस रिपोर्ट तथा परिवेश पोर्टल पर अपलोड किए गए दस्तावेजों के बीच महत्वपूर्ण अंतर पाया गया। इसके बाद खनन विभाग ने मामले की विस्तृत जांच शुरू की।जांच में सामने आया कि कुछ खदानों के आसपास के कुल क्षेत्रफल को मूल रिपोर्ट की तुलना में कम दर्शाया गया था।
पर्यावरणीय मंजूरी की प्रक्रिया में खदान क्षेत्र का वास्तविक रकबा महत्वपूर्ण मानदंड माना जाता है। आरोप है कि क्षेत्रफल को कम दिखाकर पर्यावरणीय स्वीकृति हासिल की गई और संशोधित रिपोर्ट को परिवेश पोर्टल पर अपलोड किया गया।बताया जाता है कि इसी आधार पर राज्य स्तरीय पर्यावरणीय प्रभाव आकलन प्राधिकरण से मंजूरी प्राप्त कर ली गई थी। बाद में मूल अभिलेखों और पोर्टल पर उपलब्ध दस्तावेजों के बीच विसंगति पाए जाने पर संबंधित पर्यावरणीय स्वीकृतियां निरस्त कर दी गईं। इसके साथ ही कई खनन पट्टों को भी रद्द कर दिया गया।मामले में जिला खनन पदाधिकारी राजेश कुमार के लिखित आवेदन पर नगर थाना में कांड संख्या 123/2026 दर्ज किया गया है। प्राथमिकी में पाकुड़ तथा पश्चिम बंगाल के वीरभूम क्षेत्र से जुड़े व्यवसायियों के नाम भी शामिल हैं। इस संबंध में नगर थाना प्रभारी अनिल कुमार गुप्ता ने बताया कि मामले की जांच जारी है। यह पता लगाया जा रहा है कि दस्तावेजों में बदलाव किस स्तर पर और किन परिस्थितियों में किया गया। इसके लिए विभागीय अभिलेखों, परिवेश पोर्टल के रिकॉर्ड तथा डिजिटल ट्रेल की गहन जांच की जा रही है।इस प्रकरण के सामने आने के बाद जिले में खनन कार्यों की निगरानी और पर्यावरणीय मंजूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं। जांच पूरी होने के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।


