जड़ों की ओर लौटें : विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रविन्द्र नाथ महतो
संताल परगना के हर महाविद्यालय में शुरू हो संताली विषय की शिक्षा : सांसद नलिन सोरेन
दुमका। शनिवार को सिदो कान्हु मुर्मू विश्वविद्यालय परिसर संताली भाषा-साहित्य के उत्थान और संरक्षण के संकल्प से गूंज उठा, जब सुप्रसिद्ध संताली साहित्यकार भैया हांसदा ‘चासा’ की स्मृति में एक भव्य एवं सार्थक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर भाषा, साहित्य और संस्कृति के संरक्षण, संवर्धन और वैश्विक पहचान को लेकर गहन विचार-विमर्श हुआ। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. रविन्द्र नाथ महतो अध्यक्ष, झारखंड विधानसभा, अति विशिष्ट अतिथि नलिन सोरेन सांसद, दुमका तथा विशिष्ट अतिथि डॉ. लुईस मरांडी विधायक, जामा मौजूद रहीं। कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के प्रभारी कुलपति प्रो. राम कुमार सिंह ने की।

पारंपरिक आदिवासी रीति-रिवाजों के तहत अतिथियों का स्वागत लोटा-पानी, नृत्य और ढोल-नगाड़ों के साथ किया गया, जिसने आयोजन को सांस्कृतिक गरिमा प्रदान की। दीप प्रज्वलन, माल्यार्पण और गीतों के साथ कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ हुआ। इस दौरान भैया हांसदा ‘चासा’ की स्मृति में प्रकाशित विशेष स्मारिका का विमोचन भी किया गया। स्वागत भाषण में संताली विभागाध्यक्ष डॉ. सुशील टुडू ने कार्यक्रम के उद्देश्यों को स्पष्ट करते हुए भाषा संरक्षण की आवश्यकता पर बल दिया। कुलसचिव डॉ. राजीव रंजन शर्मा ने संथाली साहित्य के इतिहास और वर्तमान परिदृश्य पर प्रकाश डालते हुए दिवंगत साहित्यकार को श्रद्धांजलि दी।

अपने संबोधन में डीएसडब्ल्यू डॉ. जैनेंद्र यादव ने संताली भाषा को संस्कृति की मजबूत कड़ी बताया और रघुनाथ मुर्मू के योगदान को विशेष रूप से रेखांकित किया। उन्होंने विश्वविद्यालय में यूजी, पीजी और पीएचडी स्तर पर संथाली अध्ययन के साथ-साथ संताल कल्चरल स्टडी’ एवं स्पोकन कोर्स संचालित होने की जानकारी दी। जिला परिषद अध्यक्ष जॉयस बेसरा ने संताली भाषा की बढ़ती प्रासंगिकता पर जोर दिया, वहीं विधायक डॉ. लुईस मरांडी ने इसे ऐतिहासिक दिन बताते हुए सुझाव दिया कि भैया हांसदा ‘चासा’ के योगदान को पाठ्यक्रम में शामिल किया जाए और संताली साहित्य परिषद के गठन पर विचार हो। सांसद नलिन सोरेन ने अपनी भाषा और संस्कृति से जुड़े रहने को पहचान की बुनियाद बताते हुए कहा कि संताल परगना के सभी कॉलेजों में संथाली विषय की पढ़ाई सुनिश्चित की जानी चाहिए।

मुख्य अतिथि डॉ. रविन्द्र नाथ महतो ने मातृभाषा के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि भाषा, संस्कृति और अस्तित्व एक-दूसरे से जुड़े हैं। उन्होंने झारखंड विधानसभा की कार्यवाही को आठ स्थानीय भाषाओं में प्रसारित करने के प्रयास का उल्लेख करते हुए संताली साहित्य के अनुवाद और विस्तार पर बल दिया। साथ ही छात्रों को शिक्षा के प्रति प्रेरित करते हुए सरकार की विभिन्न योजनाओं की जानकारी दी। अध्यक्षीय भाषण में प्रो. राम कुमार सिंह ने आधुनिक तकनीक और एआई के माध्यम से संताली भाषा के संरक्षण और प्रचार-प्रसार की आवश्यकता पर जोर दिया।

कार्यक्रम के द्वितीय सत्र में साहित्यिक गोष्ठी का आयोजन हुआ, जिसमें ठाकुर प्रसाद मुर्मू, मुलमिन टुडू, प्रो. प्रमोदनी हसदक, विजय टुडू, मरांगमयी मुर्मू, मसूदी टुडू सहित कई विद्वानों ने संताली साहित्य के इतिहास, वर्तमान, लोकगीतों की भूमिका और भाषाई विज्ञान जैसे विषयों पर अपने विचार रखे। छात्र-छात्राओं द्वारा कविता पाठ, नृत्य और संगीत की प्रस्तुतियों ने माहौल को जीवंत बना दिया। अंत में धन्यवाद ज्ञापन के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। बड़ी संख्या में शिक्षक, शोधार्थी और छात्र-छात्राओं की भागीदारी ने इसे सफल बनाया। यह आयोजन संथाली भाषा-साहित्य को नई दिशा देने और उसे वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हुआ।


